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हूतियों के सस्ते ड्रोन्स के आगे हांफने लगा सऊदी अरब, बंकर में छिपे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान

यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हो रहे भीषण ड्रोन और मिसाइल हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी समाचार पत्र ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, हूती लड़ाकों के हमलों के सामने सऊदी अरब का एयर डिफेंस सिस्टम अब कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। बढ़ते खतरे और सुरक्षा चिंताओं के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को बेहद सुरक्षित और आधुनिक बंकरों वाले सीक्रेट शाही ठिकानों पर शिफ्ट कर दिया गया है, जहां से वे देश की कमान संभाल रहे हैं।

क्राउन प्रिंस की सुरक्षा में अभेद्य बदलाव

हूती विद्रोहियों के मिसाइल स्ट्राइक के खतरे को देखते हुए क्राउन प्रिंस की सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बिन सलमान किसी एक जगह पर टिकने के बजाय लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं। उन्हें ऐसे हैवी गार्डेड महलों में रखा गया है जो जमीन से कई फीट नीचे बने मिसाइल और बम-रोधी बंकरों से लैस हैं। इन बंकरों में स्वतंत्र ऑक्सीजन, एयर-फिल्ट्रेशन और पावर बैकअप की व्यवस्था है, जिससे बाहर निकले बिना हफ्तों तक सुरक्षित रहा जा सकता है। उनकी सुरक्षा में केवल विशेष और चुनिंदा गार्ड्स की टीम तैनात है।

एयर डिफेंस मिसाइलों का सीमित दायरा

मिसाइलों को हवा में तबाह करने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक तेजी से खत्म होने के कारण रियाद प्रशासन ने अपनी सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। सऊदी अरब अब पूरे देश के आसमान को एक साथ कवर करने के बजाय अपनी एयर डिफेंस बैटरियों को केवल दो सबसे महत्वपूर्ण जगहों पर री-डिप्लॉय कर रहा है। इनमें पहला देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले क्रिटिकल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर (तेल के कुएं, रिफाइनरी और गैस प्लांट) और दूसरा क्राउन प्रिंस तथा शाही परिवार के महलों की सुरक्षा शामिल है।

रियाद तक पहुंचीं हूती क्रूज मिसाइलें

सऊदी अरब की चिंता तब और बढ़ गई जब हाल ही में हूती विद्रोहियों की दो क्रूज मिसाइलों ने सऊदी सीमा के भीतर 800 किलोमीटर से ज्यादा अंदर तक प्रवेश कर लिया। इनमें से एक क्रूज मिसाइल को रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हवा में ही मार गिराया गया, जबकि दूसरी मिसाइल एयर डिफेंस को चकमा देकर अपने तय लक्ष्य पर जा टकराई। राजधानी के इतने करीब और 800 किलोमीटर अंदर तक मिसाइलों का पहुंचना सऊदी एयर डिफेंस नेटवर्क की गंभीर सीमाओं को उजागर करता है।

आर्थिक चुनौती और अमेरिका पर निर्भरता

सऊदी अरब मुख्य रूप से अमेरिकी ‘पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम’ पर निर्भर है, लेकिन इस युद्ध में उसे भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। हूती विद्रोही जिन सस्ते ड्रोन्स और मिसाइलों से हमला करते हैं, उनकी कीमत केवल कुछ हजार डॉलर होती है, जबकि उन्हें नष्ट करने के लिए दागी जाने वाली एक पैट्रियट मिसाइल की कीमत लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये (3 से 4 मिलियन डॉलर) होती है। लगातार हमलों के कारण सऊदी अरब का कीमती स्टॉक खाली हो रहा है और अमेरिका से नई मिसाइलों की आपूर्ति में देरी ने संकट को और बढ़ा दिया है।

 

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