बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्ष 2022 के दौरान अदालत परिसर के भीतर अपनी अलग रह रही पत्नी की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी पूर्व सैनिक दीपक पांडुरंग धवले को आखिरकार जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की एकल पीठ ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि वह पिछले चार साल और चार महीने से लगातार सलाखों के पीछे बंद है और उसके खिलाफ मुख्य मुकदमे की सुनवाई अभी तक शुरू भी नहीं हो सकी है।
मुकदमे में देरी और कानूनी परिस्थितियां
अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया पर गौर करते हुए पाया कि वर्ष 2024 के बाद से इस आपराधिक मामले में आगे की कोई ठोस कानूनी कार्रवाई या प्रगति नहीं हुई है। इन सभी परिस्थितियों के साथ-साथ भविष्य में मुकदमे के निपटारे में लगने वाले लंबे संभावित समय को मद्देनजर रखते हुए, अदालत ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने का यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील सत्यव्रत जोशी ने दलील दी थी कि उनका मुक्किल देश की रक्षा करने के बाद सेना से सेवानिवृत्त हुआ है और जेल में लंबा समय बिता चुका है।
हत्या की सनसनीखेज वारदात का घटनाक्रम
यह पूरा मामला 7 जून 2022 का है, जब मृतका मंजुला घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के सिलसिले में अपने वकीलों से मिलने कोर्ट पहुंची थी। वह अपने परिवार के साथ अदालत परिसर में एक पेड़ की छांव में अपनी बारी का इंतजार कर रही थी, तभी सुबह करीब 11:45 बजे दीपक अपने भाई के साथ वहां पहुंचा। उसने अपनी पत्नी पर पिस्तौल से तीन राउंड ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
बीच-बचाव करने वालों और बेटियों को छोड़ना
अदालत ने गवाहों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का सूक्ष्म अध्ययन करते हुए कहा कि घटना के दौरान आरोपी का मुख्य गुस्सा और नाराजगी केवल अपनी पत्नी के खिलाफ थी। वारदात के वक्त वहां महिला के परिवार के सदस्य और उनकी दोनों बेटियां भी मौजूद थीं। कोर्ट ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि पत्नी को गोली मारने के बाद आरोपी ने अपने सास-ससुर या अपनी बेटियों पर गोलियां नहीं चलाईं, बल्कि बीच-बचाव करने आए ससुर को लात मारी और सास के सिर पर पिस्तौल के बट से वार किया।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और पुराना विवाद
दीपक धवले और मंजुला का विवाह साल 2005 में हुआ था और वे ठाणे जिले के अंबरनाथ इलाके में रहते थे, लेकिन शादी के एक साल बाद ही उनके बीच वैवाहिक मतभेद शुरू हो गए थे। साल 2020 में दीपक ने भारतीय सेना की नौकरी छोड़कर रायगढ़ जिले की एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू कर दी थी, इसी दौरान मंजुला ने उसके खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। तमाम परिस्थितियों, आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास न होने और मुकदमे में देरी को देखते हुए हाई कोर्ट ने उसकी याचिका मंजूर कर ली।
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