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राजस्थान ने ज़्यादा जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की मदद के लिए सरकारी अस्पतालों में ‘प्रसव सखी’ सिस्टम किया शुरू

पिछले कुछ महीनों में कई गर्भवती महिलाओं की मौत के बाद राजस्थान सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में ‘प्रसव सखी’ सिस्टम शुरू किया है। इस पहल का मकसद सरकारी अस्पतालों में आने वाली ज़्यादा जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर सपोर्ट, गाइडेंस और समय पर इलाज देना है।

यह पहल पांच दिन के एक खास अभियान का नतीजा है, जिसमें 3.56 लाख से ज़्यादा महिलाओं के रिकॉर्ड की जांच करके 37,558 ऐसी गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई, जिन्हें एनीमिया, हाइपरटेंशन, डायबिटीज और दूसरी दिक्कतें थीं।

राज्य के मेडिकल और हेल्थ डिपार्टमेंट की गाइडलाइंस के मुताबिक, यह सिस्टम मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों, ज़िला अस्पतालों और ज़्यादा डिलीवरी वाले फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (FRUs) में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

इस नए सिस्टम के तहत, ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ़, ANM या चुनी हुई महिला हेल्थ वर्कर जो गुलाबी एप्रन पहनेंगी ‘प्रसव सखी’ के तौर पर काम करेंगी। वे अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिलीवरी, डिलीवरी के बाद की देखभाल और छुट्टी मिलने तक हर चरण में ज़्यादा जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की मदद करेंगी। साथ ही, वे रजिस्ट्रेशन, जांच, मेडिकल सलाह, इलाज, स्पेशलिस्ट सर्विस और ज़रूरत पड़ने पर रेफरल जैसी प्रक्रियाओं में तालमेल बिठाएंगी।

24×7 मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ हेल्प डेस्क

मेडिकल और हेल्थ डिपार्टमेंट की प्रिंसिपल सेक्रेटरी गायत्री राठौड़ ने कहा कि हर तय अस्पताल में 24×7 मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ हेल्प डेस्क बनाए जाएंगे, जो गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों के लिए संपर्क का मुख्य ज़रिया होंगे।

गायत्री राठौड़ ने कहा, “हेल्प डेस्क पर मौजूद ‘प्रसव सखी’ अस्पताल की सेवाओं, जांच और इलाज के बारे में जानकारी देंगी और मरीज़ों व उनके परिवारों का मार्गदर्शन भी करेंगी। ‘104 जननी एक्सप्रेस’, हेल्प डेस्क और ‘प्रसव सखी’ को जोड़ने वाला एक इंटीग्रेटेड सिस्टम घर से अस्पताल तक सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन और अस्पताल के अंदर बिना किसी रुकावट के सर्विस डिलीवरी सुनिश्चित करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि ज़्यादा जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को ट्रांसपोर्टेशन और इलाज, दोनों में प्राथमिकता दी जाएगी।

खास बात यह है कि कोटा, बीकानेर, जोधपुर और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों में पिछले कुछ महीनों में 31 गर्भवती महिलाओं की मौत की खबरें आई हैं। इन मौतों के बाद सरकार ने पूरे राज्य में गर्भवती महिलाओं की खास स्क्रीनिंग शुरू की।

 

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