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करूर भगदड़ मामला पर विजय सरकार का बड़ा फैसला, हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती

तमिलनाडु के चर्चित करूर भगदड़ मामले में राज्य सरकार(Vijai government) ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। सरकार मंगलवार को इस संबंध में शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रही है। यह मामला उन सरकारी नौकरियों से जुड़ा है जो करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को दी गई थीं। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने राज्य सरकार द्वारा जारी सरकारी नौकरी के सभी नियुक्ति आदेश रद्द कर दिए।

अदालत ने कहा कि सरकारी नौकरी कोई खैरात नहीं है जो ऐसे ही किसी को भी दे दी जाए बल्कि यह संविधान और निर्धारित नियमों के अनुसार योग्य उम्मीदवारों को ही मिलनी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी कार्यपालिका की शक्तियों का इस्तेमाल संवैधानिक सीमाओं के भीतर ही कर सकती है।

करूर भगदड़ में गई थीं 41 लोगों की जान

27 सितंबर 2025 को करूर में मुख्यमंत्री थलापति विजय की चुनावी रैली के दौरान अचानक भगदड़ मच गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। सत्ता में आने के बाद 10 जुलाई को राज्य सरकार ने मृतकों के 31 परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे थे। बाद में इन नियुक्तियों को जनहित याचिकाओं के जरिए हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।

अदालत ने सरकार को क्या सलाह दी?

हाई कोर्ट ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनकी मदद के लिए अन्य प्रभावी कदम उठा सकती है। अदालत ने सुझाव दिया कि प्रभावित परिवारों के योग्य सदस्यों को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और उद्यमिता से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकें।

राज्य सरकार का मानना है कि पीड़ित परिवारों की सहायता के उद्देश्य से नौकरियां दी गई थीं, इसलिए वह हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। सरकार का कहना है कि इस मामले में बिना देरी किए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

मामले की जांच अभी भी जारी

करूर भगदड़ मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है और इस जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर की जा रही है। इससे पहले मुख्यमंत्री थलापति विजय यह आरोप भी लगा चुके हैं कि यह हादसा तत्कालीन डीएमके सरकार की कथित साजिश का परिणाम था। हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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