अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण कूटनीतिक और सैन्य तनाव के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में भाग लेने के लिए ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को प्रवेश की अनुमति देगा। अमेरिकी विदेश विभाग ने गुरुवार को इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को निभाते हुए यह निर्णय लिया गया है।
अमेरिका ने मसूद पेजेश्कियान और अब्बास अराघची को दिया वीजा, न्यूयॉर्क जाने की मिली मंजूरी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते होने वाली UN जनरल असेंबली की बैठकों के लिए न्यूयॉर्क जा रहे हैं। ईरान के साथ 6 महीने से चल रहे युद्ध के बावजूद… pic.twitter.com/VvmKLK0weY
— RT Hindi (@RT_hindi_) September 18, 2026
राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को मिलेगा अमेरिकी वीजा
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका द्वारा जारी किए जाने वाले वीजा हासिल करने वालों में ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अरागची प्रमुख रूप से शामिल हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम और शांति बहाली को लेकर अनिश्चित और रुक-रुक कर बातचीत का दौर चल रहा है। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद यह क्षेत्रीय संघर्ष शुरू हुआ था, जिसके जवाब में तेहरान ने इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले खाड़ी देशों पर हमले किए थे।
कड़े प्रतिबंधों के दायरे में रहेगी ईरानी टीम
हालांकि वीजा मंजूर करने के बावजूद अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर सख्त यात्रा प्रतिबंध लागू रहेंगे। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार प्रतिनिधिमंडल का आकार छोटा रखा गया है। इसके अलावा, मौजूदा अमेरिकी नीतियों के तहत अधिकारियों द्वारा लग्जरी और अन्य गैर-जरूरी सामान खरीदने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उनकी आवाजाही को केवल संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, ईरानी मिशन, राजदूत के आवास और जॉन एफ कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक ही सीमित रखा जाएगा।
1947 के UN समझौते का पालन
सन 1947 के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते के तहत अमेरिका का यह कानूनी दायित्व है कि वह संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में शामिल होने वाले विदेशी राजनयिकों को देश में प्रवेश की अनुमति दे। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और विदेश नीति के आधार पर अमेरिका को वीजा खारिज करने का अधिकार भी प्राप्त है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप प्रशासन ने एक दिन पहले ही फिलिस्तीनी अधिकारियों के अमेरिका प्रवेश पर रोक लगाने का ऐलान किया था, जिसके ठीक बाद ईरान को यह छूट दी गई है।
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