संसद का मानसून सत्र लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया। सत्र के समापन के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधायी कामकाज के लिहाज से सत्र सफल रहा, लेकिन लगातार हंगामे और व्यवधान के कारण सार्थक बहस प्रभावित हुई।
12 विधेयक हुए पारित
किरेन रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों से कुल 12 महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। हालांकि, विपक्ष के हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही पर असर पड़ा। उनके मुताबिक, आवंटित कुल समय में लोकसभा में केवल 19 प्रतिशत और राज्यसभा में 39 प्रतिशत ही कामकाज हो सका। किरेन रिजिजू ने कहा कि एनडीए के सांसदों और कुछ विपक्षी सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया, लेकिन प्रमुख विपक्षी दलों की ओर से लगातार व्यवधान और वॉकआउट देखने को मिला।
11 बिल बिना चर्चा के पास होने का दावा
किरेन रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में पारित 12 विधेयकों में से 11 को विपक्ष के चर्चा में हिस्सा नहीं लेने के कारण बिना बहस के पारित करना पड़ा। उनके अनुसार, केवल लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक पर दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा हुई।
‘सरकार चर्चा के लिए तैयार, विपक्ष भाग रहा’
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि अपने लंबे संसदीय अनुभव में उन्होंने पहली बार ऐसा विपक्ष देखा है जो चर्चा से पीछे हट रहा है।उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर विपक्ष सरकार से सवाल करता है और सरकार को जवाब देना पड़ता है, लेकिन इस बार सरकार खुद चर्चा के लिए तैयार थी और विपक्ष अलग-अलग कारणों से इससे बचता रहा। रिजिजू ने इसे संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं बताया।
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