अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट(Ram Mandir Trust) के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। इस पद के लिए 5,300 से अधिक आवेदन मिलने के बाद उनकी स्क्रीनिंग की गई। शुरुआती छंटनी के बाद 54 उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया है।
इनमें से 18 उम्मीदवारों को अंतिम साक्षात्कार के लिए अयोध्या बुलाया गया है। अंतिम चयन के बाद तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट के सामने रखा जाएगा। 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में CEO के नाम पर अंतिम फैसला होने की संभावना है।
तीन सदस्यीय समिति कर रही चयन
CEO के चयन की जिम्मेदारी तीन सदस्यीय समिति को दी गई है। इसमें सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल हैं। यह समिति आवेदनों की जांच से लेकर उम्मीदवारों के साक्षात्कार और अंतिम नामों की सिफारिश तक की प्रक्रिया संभाल रही है। ट्रस्ट ने 6 जुलाई की बैठक में इस समिति का गठन किया था।
चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद बना CEO पद
मंदिर में चढ़ावे की राशि की गणना को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए CEO का पद बनाने का फैसला किया। इसका उद्देश्य मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज, प्रशासनिक फैसलों के क्रियान्वयन, कर्मचारियों की निगरानी और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करना है। CEO ट्रस्ट के अधीन रहकर काम करेगा।
धार्मिक जिम्मेदारियां होंगी संतों के पास
मंदिर के धार्मिक और पूजा संबंधी कार्यों के लिए अलग धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया है। इसकी अध्यक्षता स्वामी गोविंद देव गिरि करेंगे। समिति में अयोध्या के कई प्रमुख संतों को भी शामिल किया गया है, जिनमें कमल नयन दास, रामानंद दास, राजकुमार दास, मिथिलेश नंदिनी शरण और दीनेंद्र दास प्रमुख हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर की धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धति की निरंतरता बनाए रखना है।