Shehbaz Sharif : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विदेशी दौरों के दौरान मिले दर्जनों महंगे तोहफे तोशाखाने में जमा करा दिए हैं। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच मिले इन गिफ्ट की संख्या अलग-अलग रिपोर्टों में 34 से 36 या उससे ज्यादा बताई गई है। कैबिनेट डिवीजन ने इनका रिकॉर्ड सार्वजनिक किया है, जबकि गिफ्ट की कीमत का आकलन किया जा रहा है। शहबाज की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पाकिस्तान में तोशाखाने को लेकर पहले से राजनीतिक विवाद रहा है।
1000 ग्राम सोना और महंगी घड़ियां शामिल
जमा कराए गए गिफ्ट में 1000 ग्राम सोना भी शामिल है। यह गिफ्ट किर्गिस्तान की ओर से दिया गया था और इसे 8 सितंबर 2026 को तोशाखाने में जमा कराया गया। इसके अलावा Rolex Day-Date, Rolex Lady Datejust, Rolex GMT-Master II और Patek Philippe Nautilus जैसी महंगी घड़ियां भी शामिल हैं।
काबा के मॉडल से लेकर गिलाफ तक
गिफ्ट की सूची में धार्मिक स्मृतियां भी हैं। इनमें काबा का मॉडल, गिलाफ-ए-काबा का 36×29 इंच का टुकड़ा और मस्जिद-ए-नबवी का मॉडल शामिल है। इसके अलावा कालीन, कफलिंक, पेन, अंगूठियां, तस्बीह, खजूर के बॉक्स, जमजम का पानी, ऊद वाले परफ्यूम, चांदी के केस में चाकू, पेंटिंग और शील्ड जैसी चीजें भी जमा कराई गई हैं।
सितंबर में बदले तोशाखाने के नियम
पाकिस्तान ने सितंबर 2026 में तोशाखाना (Management and Regulation) Rules, 2026 लागू किए हैं। इन नियमों ने 2023 की पुरानी प्रक्रिया की जगह ली है। नए प्रावधानों का उद्देश्य सरकारी गिफ्ट के रिकॉर्ड, मूल्यांकन और नीलामी की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाना है।
300 डॉलर तक के गिफ्ट पर भी नया नियम
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि 300 डॉलर तक के गिफ्ट को तय कीमत चुकाकर अपने पास रखने का पुराना विकल्प खत्म कर दिया गया है। ऐसे गिफ्ट, जिन्हें कूटनीतिक या सांस्कृतिक कारणों से लेने से मना नहीं किया जा सकता, अब तोशाखाने में जमा कराने होंगे। गिफ्ट मिलने के 30 दिन के भीतर उसे जमा करना जरूरी है। विदेश यात्रा से लौटने के बाद भी यही समयसीमा लागू होगी। अगर गिफ्ट अलग से भेजा जाता है, तो उसे जमा कराने के लिए 60 दिन का समय मिलेगा।
सरकारी अधिकारी नहीं ले सकेंगे नीलामी में हिस्सा
नए नियमों के तहत गिफ्ट की खुली सार्वजनिक नीलामी होगी। सरकारी पदाधिकारी और उनके परिवार के सदस्य इसमें हिस्सा नहीं ले सकेंगे। नीलामी की लाइव मीडिया कवरेज भी अनिवार्य होगी। हालांकि पुरातन वस्तुओं और ऐतिहासिक या सांस्कृतिक महत्व वाली चीजों को नीलामी से बाहर रखा जा सकता है। महंगे, कूटनीतिक या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील गिफ्ट के लिए विशेष समिति छूट दे सकती है।
ऐसे तय होगी गिफ्ट की कीमत
गिफ्ट का मूल्य तय करने के लिए पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) और निजी मूल्यांकनकर्ताओं की मदद ली जाएगी। दोनों आकलनों में 25 प्रतिशत से ज्यादा अंतर होने पर तीसरे मूल्यांकनकर्ता को शामिल किया जाएगा। तीन महीने से पुराना मूल्यांकन नीलामी का रिजर्व प्राइस तय करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। रिजर्व प्राइस भी आंकी गई बाजार कीमत से कम नहीं हो सकती।
नीलामी की रकम लड़कियों की शिक्षा पर होगी खर्च
तोशाखाने के रिकॉर्ड को ऑनलाइन पोर्टल पर हर महीने अपडेट करने की व्यवस्था की गई है। इसमें गिफ्ट देने वाले व्यक्ति का नाम और देश सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। हर साल तीसरे पक्ष से ऑडिट भी कराया जाएगा। नीलामी से मिलने वाली रकम अलग खाते में जमा होगी और इसे पिछड़े इलाकों में लड़कियों की प्राथमिक शिक्षा पर खर्च किया जाएगा।
इमरान खान से क्यों जुड़ा मामला?
तोशाखाना पाकिस्तान में लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को भी तोशाखाने से मिले गिफ्ट अपने पास रखने और उनसे जुड़े लेनदेन के मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। इसी वजह से शहबाज शरीफ द्वारा गिफ्ट तुरंत जमा कराने के फैसले को इमरान खान के मामले से जोड़कर देखा जा रहा है।
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