Kargil Vijay Diwas 2026: साल 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की स्मृति में लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में दो दिवसीय कारगिल विजय दिवस समारोह की शुरुआत हो गई। ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर शनिवार शाम आयोजित ‘शौर्य संध्या’ में देशभक्ति और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशेष रूप से द्रास पहुंचे और अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने शहीदों के परिजनों को सम्मान स्वरूप पवित्र कलश भी भेंट किए।
Attended the ‘Shaurya Sandhya’ organised on the eve of Kargil Vijay Diwas in Dras. While we feel a sense of pride recalling the Kargil victory, we must remember that the challenges facing us have not diminished. The Indian Defence Forces stand fully prepared to face any… pic.twitter.com/kM0zj8Jji5
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) July 25, 2026
आज मुख्य श्रद्धांजलि समारोह
शनिवार शाम आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और कारगिल युद्ध के दिग्गज भी मौजूद रहे। आज आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में रक्षा मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान दिल्ली के राष्ट्रीय समर स्मारक से निकली ‘शौर्य विजय यात्रा’ का कारगिल वॉर मेमोरियल में औपचारिक समापन होगा और वीर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी जाएगी।
‘मां तुझे सलाम’ से गूंज उठा द्रास
शाम ढलते ही द्रास घाटी देशभक्ति के रंग में रंग गई। लद्दाख स्काउट्स के बैंड ने ए.आर. रहमान का प्रसिद्ध गीत ‘मां तुझे सलाम’ प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो गया। इसके बाद सभी अतिथियों और सैन्य अधिकारियों ने मुख्य स्मारक के पास दीये जलाए। रात होते-होते वीर भूमि स्मारक क्षेत्र सैकड़ों दीपों की रोशनी से जगमगा उठा और शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
वीर माता ने साझा किया गर्व का भाव
कार्यक्रम में पहुंचीं ‘वीर माता’ मूर्ति देवी दहिया, जो 4 जाट रेजीमेंट के शहीद सिपाही रविंद्र की माता हैं, भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि जब भी वह वर्दी में जवानों को देखती हैं तो उन्हें अपने बेटे की याद आती है। कारगिल की चोटियों को देखकर उन्हें अपने बेटे की शहादत और देश सेवा पर गर्व महसूस होता है।
युद्ध संस्मरण से आधुनिक सेना तक का प्रदर्शन
समारोह की शुरुआत लामोचेन व्यू पॉइंट पर युद्ध संस्मरण कार्यक्रम से हुई, जहां वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने दुश्मनों को खदेड़कर कारगिल की चोटियों पर दोबारा तिरंगा फहराया था। कार्यक्रम में कारगिल विजय पर आधारित 33 मिनट की डॉक्यूमेंट्री और 40 वीर सपूतों के सम्मान में 17 मिनट की विशेष वीडियो क्लिप भी दिखाई गई। इसके बाद द्रास के विश्वनाथन स्टेडियम में आयोजित ‘गौरवमय संस्कृति’ कार्यक्रम में श्वेत अश्व मोटरसाइकिल टीम ने रोमांचक स्टंट प्रस्तुत किए। साथ ही भारतीय सेना के कॉम्बैट ड्रोन और अत्याधुनिक रोबोटिक म्यूल्स का प्रदर्शन किया गया, जिसने सेना की आधुनिक तकनीकी क्षमता और युद्धक तैयारियों की झलक पेश की।
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