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UNSC को भारत की दो टूक, बिना Veto पावर के स्थायी सीट मंजूर नहीं

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता हासिल करने के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि वह बिना वीटो पावर के स्थायी सीट स्वीकार नहीं करेगा। भारत ने ऐसी व्यवस्था को असमान बताते हुए कहा है कि इससे नए स्थायी सदस्यों को मौजूदा पांच शक्तिशाली देशों के मुकाबले दूसरे दर्जे का दर्जा मिलेगा। भारत के मुताबिक, सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार तभी संभव है, जब सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाएं।

वीटो के बिना स्थायी सदस्यता पर भारत को एतराज

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर-सरकारी वार्ता की पूर्ण बैठक के दौरान वीटो के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जब तक वीटो का प्रावधान बना हुआ है, तब तक सुधार के बाद गठित सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए।

पर्वथनेनी ने कहा कि वीटो के बिना दीर्घकालिक सदस्यता की अलग श्रेणी बनाना नए सदस्यों को प्रभावहीन स्थिति में रखेगा। इससे सुरक्षा परिषद के पांच मौजूदा स्थायी सदस्यों यानी P5 की निर्णय प्रक्रिया में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आएगा। उनके अनुसार, स्थायी सदस्यों की अलग-अलग श्रेणियां बनाना उस असमानता को और बढ़ा सकता है, जिसे सुधार प्रक्रिया के जरिए खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

भारत ने पुराने विस्तार से लिया सबक

भारतीय राजनयिक ने सुरक्षा परिषद के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 1965 में परिषद का विस्तार होने पर अस्थायी सदस्यों की संख्या छह से बढ़ाकर दस कर दी गई थी, लेकिन स्थायी सदस्यों की संख्या पांच ही रही। इससे स्थायी और निर्वाचित सदस्यों का अनुपात 5:6 से बदलकर 5:10 हो गया। भारत के मुताबिक, इस बदलाव से स्थायी सदस्यों की तुलनात्मक ताकत और मजबूत हुई। भारत का मानना है कि सुधार केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। सदस्यता की श्रेणियों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, परिषद के आकार और कामकाज के तरीकों पर एक साथ विचार करना जरूरी है। पर्वथनेनी ने स्पष्ट समय-सीमा और तय लक्ष्यों के साथ लिखित प्रस्तावों पर आधारित बातचीत शुरू करने की मांग भी दोहराई।

स्थायी सीट के साथ अस्थायी सदस्यता पर भी नजर

भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग करता रहा है। 1945 में स्थापित मौजूदा व्यवस्था 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती। भारत खुद को स्थायी सदस्यता का मजबूत दावेदार मानता है। इसके साथ ही भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सीट हासिल करने की भी कोशिश कर रहा है। इस सीट के लिए चुनाव अगले साल जून में होने हैं, जिसमें एशिया-प्रशांत समूह की निर्धारित एकमात्र सीट पर भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।

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Ram Janam Chauhan
Ram Janam Chauhanhttp://mhone.in
राम जनम चौहान वर्तमान में MH One News के साथ जुड़े हुए हैं। वे मुख्य रूप से पॉलिटिक्स और नेशनल न्यूज़ को कवर करते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण संस्थान के साथ की। इसके अलावा Zee Media और India News में इंटर्नशिप की है। राम जनम चौहान ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज (गोकलपुरी, दिल्ली) से पत्रकारिता एवं जनसंचार (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है।
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