Navratri Rules: पूरे भारत में नवरात्रि का पर्व बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ शक्ति स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। भक्त मां दुर्गा को सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाकर उनका विशेष श्रृंगार करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में कुछ कार्यों से दूरी बनाना जरूरी माना जाता है, ताकि पूजा-पाठ की पवित्रता और अनुशासन बना रहे।
बाल और नाखून काटने से जुड़ी मान्यता
नवरात्रि के दौरान बाल काटना, नाखून काटना और दाढ़ी बनवाना शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन कामों को नवरात्रि शुरू होने से पहले या पर्व समाप्त होने के बाद करना उचित माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि बाल और नाखून मृत कोशिकाओं से बने होने के कारण नकारात्मकता के प्रतीक माने जाते हैं। नवरात्रि में सकारात्मक ऊर्जा का विशेष महत्व होता है, इसलिए इस दौरान शरीर से जुड़ी ऐसी चीजों को काटने से बचने की परंपरा है।
कलश स्थापना और व्रत रखने वालों के लिए खास नियम
जिन लोगों ने घर में कलश स्थापित किया है या जो नवरात्रि का व्रत रखते हैं, उनके लिए इन नियमों का विशेष रूप से पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। नौ दिनों तक बाल, नाखून काटने और दाढ़ी बनवाने से दूरी बनाए रखने को पूजा की पवित्रता और धार्मिक अनुशासन से जोड़कर देखा जाता है।
तामसिक भोजन से बनाएं दूरी
नवरात्रि के दौरान मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें तामसिक आहार की श्रेणी में रखा जाता है। माना जाता है कि तामसिक भोजन से मन अशांत हो सकता है और नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं। इसलिए व्रत रखने वाले लोगों और घर में अखंड ज्योति स्थापित करने वाले भक्तों के लिए सात्विक भोजन और संयम को विशेष महत्व दिया जाता है।
क्रोध और कटु वाणी से भी बचें
नवरात्रि केवल खान-पान से जुड़े नियमों का पर्व नहीं है, बल्कि इस दौरान व्यवहार में भी संयम रखने की परंपरा है। नौ दिनों तक किसी पर क्रोध न करने, किसी को कटु शब्द न कहने और किसी का अनादर न करने की सलाह दी जाती है। घर में क्लेश से बचकर सकारात्मक और सात्विक विचार बनाए रखना शुभ माना जाता है।
घर की सुख-समृद्धि के लिए वर्जित कार्य
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तामसिक आहार से दूरी- भोजन में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसी तामसिक चीजों का प्रयोग बिल्कुल न करें, क्योंकि इनसे मन अशांत होता है।
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संयम और अनुशासन- व्रत रखने वाले और घर में अखंड ज्योति स्थापित करने वाले मनुष्यों के लिए संयम और अनुशासन का पालन करना बहुत आवश्यक है।
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सकारात्मक विचार- नौ दिनों तक घर में क्लेश न करें, किसी का अनादर न करें और मन में सात्विक विचार बनाए रखें।
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सुख-समृद्धि की प्राप्ति- इन सभी नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करने से घर में खुशहाली और समृद्धि आती है। माता रानी की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
नवरात्रि में क्यों जरूरी है अनुशासन?
मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में श्रद्धा, सात्विकता और अनुशासन के साथ मां दुर्गा की आराधना करने से भक्त को पूजा का शुभ फल प्राप्त होता है। इसलिए भक्तों को इन दिनों न केवल खान-पान में बल्कि अपने व्यवहार और दिनचर्या में भी संयम रखने की परंपरा का पालन करना चाहिए।
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