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US में पहली बार सैनिकों की गोलियों से छलनी होगा गुनहगार निदाल हसन का शरीर और दुनिया देखेगी LIVE, क्या है कानून में इसकी इजाजत?

Live Streaming Execution US: अमेरिका में पहली बार किसी दोषी को दी जाने वाली मौत की सजा का लाइव टेलीकास्ट करने की तैयारी ने कानूनी और मानवाधिकार से जुड़ी बहस छेड़ दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने घोषणा की है कि पूर्व आर्मी मेजर निदाल मलिक हसन को फायरिंग स्क्वॉड यानी सैनिकों की गोलियों से मौत की सजा दी जाएगी। हसन को 3 दिसंबर 2026 को टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर दोपहर 1 बजे मौत की सजा देने का समय तय किया गया है। यही वह जगह है, जहां उसने 2009 में गोलीबारी की थी।

2009 में फोर्ट हुड पर हुई थी गोलीबारी

5 नवंबर 2009 को अमेरिकी सेना के मनोचिकित्सक मेजर निदाल हसन ने फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी की थी। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 32 लोग घायल हुए थे। अगस्त 2013 में सैन्य अदालत ने हसन को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। अमेरिकी सेना के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2025 को उसकी सैन्य दोषसिद्धि की समीक्षा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद अक्टूबर 2026 में राष्ट्रपति ने मौत की सजा लागू करने की मंजूरी दी।

फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा कानूनी

अमेरिका में फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा देना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। 1879 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा संविधान के उस प्रावधान का उल्लंघन नहीं करती, जो क्रूर और असामान्य सजा पर रोक लगाता है। अमेरिका के पांच राज्यों- इडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलाइना और यूटा में इस तरीके की अनुमति है। हालांकि, मौत की सजा देना और उसकी लाइव स्ट्रीमिंग करना दो अलग-अलग कानूनी सवाल हैं।

लाइव स्ट्रीमिंग पर अलग नियम

अमेरिका की संघीय जेलों में मौत की सजा की वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग प्रतिबंधित है। लेकिन सैन्य जेलों के नियमों में ऐसी स्पष्ट रोक नहीं है। अमेरिकी सेना के नियम यह तय करते हैं कि मौत की सजा कौन देख सकता है। इसके तहत अधिकारियों, वकीलों, परिवार के सदस्यों और मीडिया के सीमित प्रतिनिधियों को अनुमति दी जाती है। हालांकि 18 साल से कम उम्र के लोगों को इसे देखने की इजाजत नहीं है।

इंटरनेट ने खड़ा किया नया सवाल

लाइव स्ट्रीमिंग इस नियम के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है, क्योंकि इंटरनेट पर बच्चे भी वीडियो देख सकते हैं। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सैन्य नियम उस समय बनाए गए थे, जब इंटरनेट पर इस तरह की लाइव स्ट्रीमिंग की कल्पना नहीं की गई थी। हालांकि अभी किसी अदालत ने प्रस्तावित लाइव प्रसारण को कानूनी या गैरकानूनी घोषित नहीं किया है।

1936 में आखिरी सार्वजनिक मौत की सजा

अमेरिका में आखिरी कानूनी सार्वजनिक मौत की सजा 14 अगस्त 1936 को केंटकी के ओवेन्सबोरो शहर में दी गई थी। रेनी बेथिया को एक बुजुर्ग महिला से बलात्कार और हत्या के मामले में सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी। इसके बाद अमेरिका में मौत की सजा सीमित लोगों की मौजूदगी में दी जाने लगी। अमेरिकी सेना ने आखिरी बार 1945 में फायरिंग स्क्वॉड का इस्तेमाल किया था, जबकि सेना में आखिरी मौत की सजा 1961 में दी गई थी।

अंतरराष्ट्रीय कानून में क्या है प्रावधान

अमेरिका ने 1992 में इंटरनेशनल कोवेनैंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स (ICCPR) नाम की संधि पर दस्तखत किए थे। यह समझौता क्रूर और अपमानजनक सजा पर रोक लगाता है, हालांकि बेहद गंभीर अपराधों में मौत की सजा की अनुमति देता है। अमेरिका ने इसे स्वीकार करते समय मौत की सजा से जुड़े कुछ अधिकार अपने पास रखे थे।

संयुक्त राष्ट्र ने जताया विरोध

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने लाइव टेलीकास्ट का विरोध किया है। उसका कहना है कि ऐसा प्रसारण सार्वजनिक मौत की सजा जैसा होगा और यातना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का उल्लंघन करेगा। मानवाधिकार वकील क्लाइव स्टैफर्ड स्मिथ ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह का वीडियो बच्चों को मानसिक नुकसान पहुंचा सकता है।

अमेरिका में भी योजना का विरोध

लाइव प्रसारण की योजना का अमेरिका में भी विरोध हो रहा है। रिपब्लिकन सांसद थॉम टिलिस और ऑस्टिन स्कॉट ने इसका विरोध किया है। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी और जैक रीड ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि न्याय देने और मौत को सार्वजनिक तमाशा बनाने में अंतर है। हालांकि, रिपब्लिकन सांसद एंडी ओगल्स ने योजना का समर्थन किया है।

प्रचार के लिए इस्तेमाल की आशंका

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का तर्क है कि सार्वजनिक प्रसारण से लोगों को गंभीर अपराध के परिणाम समझने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, एक्सपर्ट्स को आशंका है कि मौत की सजा का वीडियो कट्टरपंथी संगठन अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में हसन की प्रस्तावित मौत की सजा से ज्यादा बड़ा सवाल यह बन गया है कि क्या इसे इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से दिखाया जा सकता है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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