तमिलनाडु(Tamil Nadu) के करूर में TVK की रैली के दौरान हुई भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को फिलहाल राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें सरकार के नौकरी देने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया गया था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नियुक्तियों को अंतिम रूप से सही ठहरा दिया है। मामले पर आगे सुनवाई होनी बाकी है।
27 सितंबर 2025 को करूर में TVK की एक रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई थी। हादसे के बाद तमिलनाडु सरकार ने प्रभावित परिवारों की आर्थिक मदद के लिए प्रत्येक परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। सरकार ने इसे विशेष मानवीय परिस्थितियों में लिया गया कदम बताया था।
हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया था आदेश?
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने जुलाई 2026 में सरकारी नियुक्तियों को रद्द करते हुए कहा था कि सार्वजनिक रोजगार में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और अवसर के सिद्धांतों का पालन जरूरी है। अदालत के मुताबिक, किसी त्रासदी के बाद सीधे सरकारी नौकरी देना मौजूदा भर्ती व्यवस्था से अलग एक नई व्यवस्था खड़ी कर सकता है। कोर्ट ने परिवारों की मदद के लिए कौशल प्रशिक्षण, रोजगार सहायता और अन्य पुनर्वास उपायों जैसे विकल्पों की ओर भी संकेत किया था।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। अब सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद नौकरी से जुड़ा सरकारी आदेश फिलहाल प्रभावी बना हुआ है। लेकिन अंतिम फैसला आने तक यह सवाल खुला है कि ऐसी असाधारण परिस्थितियों में सरकार मानवीय आधार पर सरकारी नियुक्ति कर सकती है या नहीं। यही इस मामले का सबसे अहम कानूनी मुद्दा है।