बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के सपने लेकर दुबई गए शेखावाटी के युवाओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। झुंझुनूं और चूरू जिले के छह युवा इस समय दुबई में भारी संकट में फंस गए हैं। एजेंटों द्वारा मनचाही नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजे गए ये युवक अब वहां नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। सोशल मीडिया पर अपने दर्द बयां करते हुए वायरल वीडियो में ये युवा रोते हुए भारत सरकार, जिला प्रशासन और अपने परिजनों से सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगा रहे हैं।
50 हजार देकर गए, पर न कंपनी मिली और न तय काम
झुंझुनूं के डाबड़ी धीरसिंह निवासी टाइल मिस्त्री मोहम्मद महबूब अली ने स्थानीय एजेंट सुरेश कुमार को 50 हजार रुपये दिए थे। उन्हें दुबई की ‘एमबीएम’ कंपनी में नौकरी का भरोसा देकर वीजा दिलाया गया था, लेकिन दुबई उतरते ही उन्हें ‘एबीसी’ नाम की एक अन्य सप्लाई कंपनी में धकेल दिया गया। ऐसा ही हाल मोहम्मद शोएब अली का है, जिन्होंने एजेंट को 50 हजार रुपये दिए थे, लेकिन दुबई पहुंचने पर उन्हें वह कंपनी ही नहीं मिली जिसके लिए उनका चयन हुआ था। पहुंचते ही उनके पासपोर्ट भी छीन लिए गए।
बीमार होने पर भी दबाव
विदेश रवाना होने से पहले युवाओं को 8 घंटे की सामान्य ड्यूटी का कहकर बुलाया गया था, लेकिन दुबई में उनका शेड्यूल पूरी तरह बदल चुका है। युवाओं का आरोप है कि उन्हें सुबह 4 बजे उठकर 5-5:30 बजे काम पर निकलना पड़ता है और रात के 8 से 9 बजे तक लगातार काम कराया जाता है। यानी उनसे रोजाना लगभग 16 घंटे तक मजदूरी कराई जा रही है। अत्यधिक काम और तनाव के कारण कई युवाओं की तबीयत भी बिगड़ चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कंपनियों द्वारा उन्हें जबरन काम पर भेजने का दबाव बनाया जा रहा है।
भारत लौटने के नाम पर माँगे जा रहे 3 हजार दिरहम
मुश्किलों में घिरे इन कामगारों का कहना है कि जब उन्होंने हालात से तंग आकर भारत वापस लौटने की इच्छा जताई, तो कंपनी ने उनके सामने एक और बड़ी शर्त रख दी। घर वापसी के लिए उनसे करीब 3,000 दिरहम (भारतीय मुद्रा में लगभग 80,000 रुपये) की मांग की जा रही है। पहले ही एजेंट को हजारों रुपये दे चुके इन गरीब युवाओं के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना असंभव साबित हो रहा है। इसके अलावा खाने-पीने के लाले पड़े हैं और कमरों से सामान बाहर निकाले जाने की धमकियाँ भी मिल रही हैं।
सरकार से मदद की आस लगाए बैठे परिवार
महबूब और शोएब के साथ-साथ मोहम्मद अयान समेत कुल छह युवक 1 से 3 अक्टूबर के बीच दुबई पहुँचे थे, जिनका दावा है कि उनके अलावा लगभग 26 अन्य लोग भी वहाँ इसी तरह फंसे हुए हैं। वीडियो में युवाओं की बेबसी साफ झलक रही है। परिवारों को अब इन युवाओं के सुरक्षित लौटने और उनके पासपोर्ट वापस मिलने की उम्मीद सिर्फ भारत सरकार और प्रशासनिक मदद पर टिकी है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने की अपील की है।
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