समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के सामने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई। हालांकि, अदालत ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया, लेकिन संकेत दिया कि मामले को इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। आजम खान ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपनी गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के आदेश को चुनौती देते हुए राहत मांगी है। याचिका में उनकी तत्काल रिहाई की मांग भी की गई है।
CJI की पीठ के सामने तत्काल सुनवाई की मांग
आजम खान की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ के सामने मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। हालांकि, बाद में पीठ ने मामले पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना जताई। फिलहाल अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की है। याचिका को इस सप्ताह सूचीबद्ध किए जाने की संभावना के बाद अब आजम खान की कानूनी राहत की मांग पर शीर्ष अदालत में सुनवाई का रास्ता खुला है।
जेल से रिहाई के कुछ देर बाद गिरफ्तारी का दावा
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि आजम खान को दो पैन कार्ड रखने से जुड़े मामले में जेल से रिहा किए जाने के करीब 40 मिनट बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया था। वकील के मुताबिक, यह घटनाक्रम 29 अक्टूबर को हुआ था। ईडी ने आजम खान को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है। एजेंसी की कार्रवाई के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
विशेष अदालत के आदेश को भी चुनौती
याचिका में एक नवंबर को विशेष अदालत की ओर से आजम खान को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि मामले की सुनवाई होने तक आजम खान को हिरासत से रिहा करने पर विचार किया जाए। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है। अदालत में याचिका सूचीबद्ध होने के बाद आजम खान की गिरफ्तारी की वैधता और उनकी रिहाई की मांग पर दलीलें रखी जा सकती हैं। फिलहाल उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली है और मामले में आगे की कार्रवाई शीर्ष अदालत की सुनवाई पर निर्भर करेगी।
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