बांग्लादेश में करीब 28 महीने बाद एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बार आंदोलन की वजह सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि कम मजदूरी और बढ़ती महंगाई है। कपड़ा उद्योग के हजारों मजदूर न्यूनतम मासिक वेतन 30 हजार टका करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर सड़कें जाम की गईं, फैक्ट्रियां बंद रहीं और पुलिस के साथ टकराव की घटनाएं सामने आईं। राजधानी ढाका के मिरपुर इलाके में सोमवार को भी स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। विरोध के कारण मेट्रो सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
529 फैक्ट्रियां प्रभावित, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
कपड़ा मजदूरों का प्रदर्शन 31 अक्टूबर को शुरू हुआ था। ढाका के मिरपुर, आशुलिया, सावर और गाजीपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों ने सड़कें जाम कर दीं और गारमेंट फैक्ट्रियों में कामकाज ठप हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, अशांति के कारण कम से कम 529 कारखाने प्रभावित हुए और करीब 10 लाख श्रमिकों पर असर पड़ा। कुछ स्थानों पर आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस वाहनों तथा पुलिस बॉक्स को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी हुईं। सोमवार को कामकाज दोबारा शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन प्रदर्शन जारी रहे। बांग्लादेशी अखबार प्रथम आलो के मुताबिक, सुबह करीब 10:45 बजे मिरपुर-10 के सेनपारा परबता इलाके में मजदूरों ने मुख्य सड़क पर आने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। मिरपुर-2 में स्टेडियम के पास प्रोशिका चौराहे पर भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया। पहले हुई हिंसा के दौरान पुलिस ने पानी की बौछार और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया था। कुछ इलाकों में सीमा सुरक्षा बल (बीजीबी) भी तैनात किया गया।
12 हजार टका वेतन में परिवार चलाना मुश्किल
मजदूरों का कहना है कि उन्हें फिलहाल करीब 12 हजार टका मासिक वेतन मिलता है, जो भोजन, मकान का किराया, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च के बीच परिवार चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से वे न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 30 हजार टका करने की मांग कर रहे हैं। बांग्लादेश की सरकार ने कपड़ा उद्योग में न्यूनतम वेतन तय करने के लिए वेतन बोर्ड गठित किया है। हालांकि, मजदूरों की मांग और मौजूदा वेतन के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद यह आंदोलन देश में एक और बड़े संकट के रूप में सामने आया है।
सरकार ने पूर्व सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों पर लगाए आरोप
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने दो नवंबर को आरोप लगाया कि अपदस्थ शेख हसीना सरकार से जुड़े कुछ उद्योगपति और पूर्व जनप्रतिनिधि कपड़ा उद्योग में अशांति भड़का रहे हैं। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने कहा कि आवामी लीग से जुड़े कुछ फैक्ट्री मालिक, पूर्व सांसद, मंत्री और राज्य मंत्री मजदूरों को उकसाकर सड़क जाम, आगजनी और हिंसा करा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार के पास इन घटनाओं से जुड़े वीडियो और ऑडियो सबूत हैं। ये आरोप सरकार की ओर से लगाए गए हैं। बांग्लादेश का रेडीमेड गारमेंट उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात का प्रमुख आधार है। वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र से करीब 39.35 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो कुल निर्यात का 81 प्रतिशत से अधिक था। चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड कपड़ा निर्यातक माना जाता है। ऐसे में लंबे समय तक जारी रहने वाली हड़ताल और हिंसा से उत्पादन, निर्यात और लाखों श्रमिकों की आजीविका पर असर पड़ने की आशंका है।
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