Common Customer ID: देश के फाइनेंसियल सिस्टम को ज्यादा आसान और डिजिटल बनाने के लिए सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। आम लोगों की सुविधा के लिए एक कॉमन कस्टमर आईडी (Common Customer ID) विकसित की जा रही है, जिसके जरिए बैंकिंग, बीमा और म्यूचुअल फंड जैसी कई वित्तीय सेवाओं का उपयोग एक ही पहचान से किया जा सकेगा। इसके लागू होने के बाद अलग-अलग संस्थानों के लिए अलग ग्राहक आईडी रखने की जरूरत नहीं होगी।
अगस्त से हो सकती है शुरुआत
इस नई व्यवस्था के तहत पहले चरण में बैंक और बीमा कंपनियां अगस्त महीने से कॉमन कस्टमर आईडी सिस्टम शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके बाद इस ढांचे में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों यानी म्यूचुअल फंड से जुड़े संस्थानों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे निवेशकों को एक ही डिजिटल पहचान का लाभ मिल सके।
कैसे करेगा काम नया सिस्टम?
मार्किट रेगुलेटर्स और वित्तीय क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार इस सुविधा के तहत ग्राहक बिना अलग-अलग पहचान दस्तावेज जमा किए अपने अलग-अलग वित्तीय उत्पादों तक पहुंच बना सकेंगे। इस व्यवस्था को सेंट्रल नो योर कस्टमर (CKYC) सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें ग्राहकों की सहमति मिलने के बाद उनका डेटा एक केंद्रीय रजिस्ट्री में सुरक्षित रखा जाएगा। एक बार खाता खुलने के बाद सभी जरूरी जानकारियां इसी रजिस्ट्री में उपलब्ध रहेंगी और ग्राहक जरूरत पड़ने पर अपने रिकॉर्ड आसानी से देख सकेंगे।
10 साल की तैयारी के बाद नई व्यवस्था
यह व्यवस्था लंबे समय की तैयारी का परिणाम है। पिछले करीब 10 सालों से भारत सिंगापुर और कई यूरोपीय देशों की तरह एक साझा डिजिटल पहचान आधारित वित्तीय सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इस मॉडल का उद्देश्य एक ही पहचान और कॉमन वेरिफिकेशन प्रक्रिया के जरिए ग्राहकों को सभी वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।
फ्रॉड पर भी लगेगी लगाम
वित्तीय नियामकों का मानना है कि नया सिस्टम वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान करने और उसे रोकने में भी मददगार साबित होगा। अगले साल से म्यूचुअल फंड और ब्रोकरेज जैसी कैपिटल मार्केट से जुड़ी संस्थाओं को भी इस सिस्टम से जोड़ने की योजना है। उन्हें अपने-अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार डेटा अपडेट और उपयोग करने की सुविधा मिलेगी।
RBI, SEBI और IRDAI मिलकर कर रहे काम
सूत्रों के अनुसार इस साझा फ्रेमवर्क को तैयार करने में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) मिलकर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य देश में वित्तीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाना, प्रक्रियाओं को आसान बनाना और अधिक लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना है।
क्यों है यह बदलाव अहम?
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 89 फीसदी लोगों के पास बैंक खाते हैं, लेकिन बीमा, म्यूचुअल फंड और पेंशन जैसी सेवाओं में लोगों की भागीदारी अभी भी बहुत कम है। ऐसे में कॉमन कस्टमर आईडी सिस्टम से अलग-अलग वित्तीय उत्पादों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है, जिससे अधिक लोग निवेश और वित्तीय सुरक्षा से जुड़ सकेंगे।
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