भारत ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 26 अक्टूबर 2026 को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में सशस्त्र बलों के लिए करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये की पूंजीगत खरीद से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) दी गई है, जो रक्षा खरीद प्रक्रिया का शुरुआती चरण है। इस फैसले के तहत थल, जल और वायु तीनों मोर्चों पर सैन्य उपकरणों, निगरानी प्रणालियों और आधुनिक हथियारों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है।
थलसेना को मिलेंगे नए हथियार
भारतीय सेना के लिए हाई मोबिलिटी व्हीकल, सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम, गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम, लाइट मल्टी रोल हेलीकॉप्टर और वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म आधारित काउंटर-ड्रोन सिस्टम, लंबी दूरी के ड्रोन, सर्विलांस UAV, एकीकृत निगरानी एवं स्ट्राइक सिस्टम और लॉन्ग रेंज कामिकाजे ड्रोन सिस्टम भी प्रस्तावों में शामिल हैं।
हाई मोबिलिटी व्हीकल कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैनिकों और सैन्य सामग्री की आवाजाही को आसान बनाएंगे। वहीं, सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम मशीनीकृत सैन्य टुकड़ियों को अधिक गतिशीलता और मारक क्षमता प्रदान करेगा। गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम से गोलीबारी के स्रोत का पता लगाने और वास्तविक समय में जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी। नए एयर डिफेंस और काउंटर-ड्रोन सिस्टम छोटे हवाई खतरों से निपटने तथा सैन्य वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने में उपयोगी होंगे। हल्के मल्टी रोल हेलीकॉप्टर सेना और वायुसेना दोनों की जरूरतें पूरी करेंगे। इनका इस्तेमाल निगरानी, लड़ाकू अभियानों, खोज-बचाव और आपदा राहत में भी किया जा सकेगा।
नौसेना की मिसाइल सुरक्षा और वायुसेना की क्षमताएं होंगी मजबूत
भारतीय नौसेना के लिए एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम (AODS) और अन्य प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म की खरीद को मंजूरी मिली है। AODS दुश्मन की एंटी-शिप मिसाइलों को जहाज से दूर भटकाने में मदद करने वाली प्रणाली है। इससे समुद्र में तैनात युद्धपोतों की सुरक्षा बेहतर करने में सहायता मिल सकती है। स्वदेश में डिजाइन और निर्मित होने वाले नौसैनिक प्लेटफॉर्म भी आधुनिक समुद्री अभियानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे।
भारतीय वायुसेना के लिए हेलीकॉप्टर, एयर डिफेंस सिस्टम, हथियार और मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार सिस्टम खरीदने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। स्पेशल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर वायुसेना की परिवहन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे। वहीं, एक्स-बैंड डॉप्लर रडार अग्रिम क्षेत्रों में स्थानीय मौसम की अधिक सटीक जानकारी उपलब्ध कराने में उपयोगी होंगे। मौसम संबंधी बेहतर जानकारी सैन्य अभियानों की योजना बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा
इस फैसले का एक प्रमुख पहलू घरेलू रक्षा उद्योग की भागीदारी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद की ओर से मंजूर प्रस्तावों के तहत करीब 82 फीसदी खरीद भारतीय उद्योग से किए जाने का प्रावधान है। इससे देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण, तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, इन प्रस्तावों में जमीन पर सैन्य गतिशीलता और तोपखाने की ताकत बढ़ाने, समुद्र में युद्धपोतों की सुरक्षा मजबूत करने तथा हवाई रक्षा और निगरानी क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया है। हालांकि, आवश्यकता की स्वीकृति मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी उपकरणों की खरीद पूरी हो गई है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार खरीद के अगले चरण पूरे किए जाएंगे।
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