महाराष्ट्र(Maharashtra) सरकार ने निजी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में इलाज की लागत को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अहम कदम उठाया है। सरकार के नए निर्देश के अनुसार, सभी निजी अस्पतालों को अपनी चिकित्सा सेवाओं, जांच और उपलब्ध सुविधाओं की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होंगी। इसका उद्देश्य मरीजों और उनके परिजनों को इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च की जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के मुताबिक, अस्पतालों के इंक्वायरी काउंटर, हेल्प डेस्क और बिलिंग काउंटर पर रेट लिस्ट तथा उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं की जानकारी आसानी से मिलनी चाहिए। इससे मरीजों को अलग-अलग जांच, उपचार और अन्य सुविधाओं के लिए कितना भुगतान करना होगा, यह समझने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, मेडिकल वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों को उपलब्ध कराए जाने वाले विशेष चिकित्सा पैकेज की कीमतों की जानकारी भी स्पष्ट रूप से देनी होगी। अस्पतालों को इन पैकेजों की दरों में पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।
मराठी और अंग्रेजी में प्रदर्शित करनी होगी रेट लिस्ट
सरकारी आदेश (GR) के अनुसार, अस्पतालों को अपनी सेवाओं की दरें मराठी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में ऐसी जगह प्रदर्शित करनी होंगी जहां मरीज और उनके परिजन उन्हें आसानी से देख सकें। महाराष्ट्र नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन रूल्स, 2021 की अनुसूची-3 में शामिल चिकित्सा सेवाओं और सुविधाओं की दरों को भी इस व्यवस्था के तहत प्रदर्शित करना होगा।
यदि किसी सेवा की कीमत में बदलाव होता है तो अस्पताल को रेट लिस्ट भी अपडेट करनी होगी, ताकि मरीजों को सही जानकारी मिल सके।
नियमों का पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई
सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने जिला सिविल सर्जनों के साथ-साथ जिला और नगरपालिका स्वास्थ्य अधिकारियों को निजी चिकित्सा संस्थानों तक इन निर्देशों की जानकारी पहुंचाने को कहा है। नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस पहल से इलाज के खर्च को लेकर होने वाली गलतफहमी, अतिरिक्त वसूली और बिल संबंधी विवादों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही, मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।