उत्तर प्रदेश के मथुरा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ(CM Yogi) ने 1,051 करोड़ रुपये की लागत वाली 229 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने विकास के साथ-साथ प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को लेकर भी अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री के संबोधन में विकास और सांस्कृतिक पहचान दोनों को लेकर स्पष्ट संदेश नजर आया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लंबे समय तक विकास को केवल सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं तक सीमित नजरिए से देखा गया। उनके मुताबिक, विकास की प्रक्रिया में कई बार देश और समाज की सांस्कृतिक विरासत की अनदेखी हुई। उन्होंने कहा कि भारत ने अलग-अलग दौर में विदेशी आक्रमणों का सामना किया लेकिन उसकी परंपराएं और सांस्कृतिक स्मृतियां खत्म नहीं हुईं। उन्होंने इसे सनातन परंपरा की मजबूती और ब्रज की पहचान से जोड़ा।
काशी और अयोध्या का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री ने काशी और अयोध्या का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन ऐतिहासिक परिस्थितियों के बावजूद धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं बनी रहीं। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर को इसी निरंतरता का उदाहरण बताया। उनका कहना था कि भारत को समझने के लिए संतों और क्रांतिकारियों के योगदान को जानना भी जरूरी है।
कानून-व्यवस्था को बताया बड़ा बदलाव
योगी ने 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश में दंगों और अराजकता के कारण उत्सवों का आयोजन भी चुनौतीपूर्ण माना जाता था। उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में राज्य दंगा और कर्फ्यू से मुक्त हुआ है। कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज उत्सव उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुके हैं। उनके मुताबिक, यही बदलाव प्रदेश में आए परिवर्तन का महत्वपूर्ण संकेत है।