उत्तराखंड(Uttarakhand) में लगातार हो रही बारिश का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है। राज्य के कई इलाकों में भूस्खलन और पहाड़ियों से मलबा गिरने की घटनाओं के कारण कुल 71 सड़कें बंद हो गई हैं। इनमें एक राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ लोक निर्माण विभाग (PWD), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और अन्य विभागों के कई मार्ग शामिल हैं।
सड़कों को दोबारा चालू करने के लिए संबंधित विभागों की टीमें मशीनों के साथ लगातार राहत और बहाली कार्य में लगी हुई हैं। बारिश के बावजूद भी चारधाम यात्रा फिलहाल जारी है जिसमें प्रशासन यात्रा मार्गों की लगातार निगरानी कर रहा है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित बनी रहे और किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी
लगातार वर्षा के बावजूद राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है। फिर भी संभावित जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई करके आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
तीन दिन तक भारी बारिश का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तरकाशी, देहरादून, नैनीताल और पिथौरागढ़ समेत कई जिलों में अगले तीन दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताते हुए अलर्ट जारी कर दिया है। साथ ही गरज-चमक और तेज बारिश की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों के आसपास न जाने और पहाड़ी रास्तों पर निकलने से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष से तुरंत संपर्क करने की सलाह भी दी गई है।