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कार्यभार मिलते ही एक्शन मोड में प्रह्लाद जोशी, अर्जेंट मीटिंग कर अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 26 दिनों से चल रहा छात्रों का प्रदर्शन अब समाप्त हो गया है। इसी दौरान केंद्र सरकार में बड़ा बदलाव देखने को मिला। वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद शनिवार शाम केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी(Pralhad Joshi) को सौंप दिया। रविवार सुबह उन्होंने सबसे पहले हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर शिक्षा मंत्रालय पहुंचकर आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार ग्रहण किया। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी और मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

कार्यभार संभालने के तुरंत बाद प्रह्लाद जोशी ने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की और सभी से परिचय लिया। बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी कामकाज में किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करने की अपेक्षा जताई।

नई जिम्मेदारी के साथ बड़ी चुनौती

कार्यभार संभालने से पहले प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें जो नई जिम्मेदारी मिली है उसे वह पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में कई अहम सुधार हुए हैं और आगे भी सुधार की प्रक्रिया जारी रहेगी। हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती NEET परीक्षा विवाद और पेपर लीक से जुड़े मुद्दों को संभालना होगी।

इस मामले को लेकर सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है। पेपर लीक के बाद शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन दिल्ली से निकलकर बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों तक पहुंच गया था। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रह्लाद जोशी शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारियों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

लंबे राजनीतिक अनुभव वाले नेता

प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के अनुभवी मंत्रियों में शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त उनके पास खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, ऊर्जा और उपभोक्ता मामलों जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी है।

वह वर्ष 2004 से लगातार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने जाते रहे हैं। पिछली मोदी सरकार में उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी। उनका नाम कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की संभावित दौड़ में भी चर्चा का विषय रहा है।

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