Ethanol: सरकारी तेल विपणन कंपनियां 1 नवंबर से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष में गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से तैयार एथेनॉल नहीं खरीदेंगी। सरकार के इस फैसले का सीधा असर चीनी उद्योग पर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि गन्ने से एथेनॉल उत्पादन सीमित होने के कारण मिलों के पास चीनी बनाने के लिए ज्यादा कच्चा माल उपलब्ध होगा, जिससे घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
पांच सरकारी कंपनियों ने जारी किया टेंडर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 11 अरब लीटर एथेनॉल खरीदने का संयुक्त टेंडर जारी किया है।
नए टेंडर में गन्ने के एथेनॉल पर बोली नहीं होगी स्वीकार
टेंडर के नए दस्तावेजों में सरकार के ताजा दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि गन्ने के सीधे रस, शुगर सिरप या बी-हैवी शीरे से तैयार एथेनॉल के लिए इस बार कोई बोली स्वीकार नहीं की जाएगी। इसका मतलब है कि चीनी मिलों में उपलब्ध गन्ने का अधिक हिस्सा अब चीनी उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
कम बारिश से गन्ने की पैदावार पर असर
भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इस साल मानसूनी बारिश का पैटर्न असंतुलित रहने से प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। शक्तिशाली अल नीनो के प्रभाव के कारण कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बने, जिसका असर गन्ने की पैदावार और रिकवरी दर पर पड़ने की आशंका है। उत्पादन घटने की संभावना के बीच सरकार का यह फैसला चीनी की घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
20% एथेनॉल ब्लेंडिंग योजना पर नहीं पड़ेगा असर
गन्ने से बने एथेनॉल की खरीद रोकने के बावजूद पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य पर इसका असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। तेल कंपनियों ने एथेनॉल की जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे स्रोतों से खरीद का रास्ता खुला रखा है।
चावल, मक्का और सी-हैवी शीरे से बनेगा एथेनॉल
नए टेंडर के तहत आपूर्तिकर्ता सी-हैवी शीरे, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास उपलब्ध अतिरिक्त चावल, खराब खाद्यान्न, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत मंजूर अन्य कृषि अवशेषों से एथेनॉल तैयार कर इसकी आपूर्ति कर सकेंगे। इस तरह सरकार एक तरफ चीनी के लिए गन्ने की उपलब्धता बनाए रखने और दूसरी तरफ एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को जारी रखने की कोशिश कर रही है।
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