महाराष्ट्र में त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी का तरीका अब पहले से तय रहेगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 3 सितंबर से ऐसी व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया है, जिसके तहत जनवरी से दिसंबर तक आने वाले प्रमुख त्योहारों के लिए जांच और कार्रवाई की योजना तैयार रहेगी। FDA आयुक्त तुकाराम मुंडे के मुताबिक, भारत में पहली बार इस तरह पूरे साल के लिए त्योहारों से जुड़ी खाद्य सुरक्षा कार्यप्रणाली लागू की गई है।
त्योहार और खाद्य पदार्थ के हिसाब से होगी निगरानी
FDA ने अलग-अलग त्योहारों के दौरान मिलावट की संभावित आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए निगरानी की व्यवस्था बनाई है। उदाहरण के लिए मकर संक्रांति पर तिलगुड़, जबकि होली और ईद के दौरान मिठाई व मालपुआ जैसे खाद्य पदार्थ जांच के दायरे में रहेंगे। उपवास में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के लिए भी अलग जांच व्यवस्था रखी गई है। इसके अलावा तेल, मेवा, बेकरी उत्पाद और ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए पहुंचने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी निगरानी होगी। महाप्रसाद, भंडारा और लंगर जैसे आयोजनों में तैयार होने वाले भोजन की भी जांच की जाएगी। आयोजकों को खाद्य सुरक्षा के नियमों को लेकर नियमित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी इस योजना में शामिल है। त्योहार या आयोजन से जुड़े भोजन की जानकारी FDA को उपलब्ध करानी होगी।
चार चरणों में होगी जांच
पूरे साल के त्योहारों को मिलावट की आशंका और आयोजन के स्तर के आधार पर तीन श्रेणियों में रखा गया है। पहले स्तर में गणेश उत्सव और नवरात्रि जैसे बड़े राज्यस्तरीय त्योहार शामिल हैं। इनके लिए 15 से 21 दिन पहले से तैयारी और निगरानी की योजना रहेगी। दूसरे स्तर में महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति जैसे त्योहार हैं, जिनके लिए 1 से 14 दिन की तैयारी अवधि तय की गई है। तीसरे स्तर में स्थानीय मिठाई की दुकानों को शामिल किया गया है। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई को चार स्तरों में भी बांटा गया है। इसमें त्योहार के बाद 30 दिनों तक कार्रवाई और निगरानी जारी रखने की योजना शामिल है। किस त्योहार पर कौन से खाद्य पदार्थ जांचे जाएंगे, यह भी पहले से तय रहेगा।
तुकाराम मुंडे बोले- ‘मैं भगवान नहीं हूं’
FDA आयुक्त तुकाराम मुंडे ने बताया कि उन्होंने विभाग में ‘सेफ फूड और सेफ ड्रग’ की अवधारणा पर काम शुरू किया है। उनका कहना है कि त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं की आशंका भी बढ़ती है, इसलिए पूरे साल की योजना जरूरी थी।
Read More
तैरने नहीं आता था फिर भी न रुके कदम… 20 साल के बिट्टू ने अजनार नदी साफ कर पेश की मिसाल

