Janmashtami Vrat Rules During Periods: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस बार जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को यानिकि कल है। भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस पर्व पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी व्रत रखती हैं और लड्डू गोपाल की पूजा करती हैं। हालांकि, कई महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि अगर जन्माष्टमी के दिन मासिक धर्म चल रहा हो तो क्या व्रत रखा जा सकता है और क्या लड्डू गोपाल की पूजा व सेवा की जा सकती है।
पीरियड्स में रख सकती हैं जन्माष्टमी का व्रत?
धार्मिक दृष्टि से व्रत का आधार श्रद्धा, संकल्प और भक्ति को माना जाता है। मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। ऐसे में पीरियड्स के दौरान व्रत रखना या न रखना महिला की शारीरिक क्षमता, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है। अगर शरीर स्वस्थ है और व्रत रखने में किसी तरह की परेशानी नहीं है तो श्रद्धा के अनुसार फलाहार या सामान्य व्रत रखा जा सकता है। वहीं कमजोरी, दर्द या किसी अन्य परेशानी में व्रत न रखना भी सही है।
पीरियड्स में ऐसे करें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा
मासिक धर्म के दौरान पूजा को लेकर अलग-अलग परिवारों में अलग परंपराएं हैं। कुछ पारंपरिक परिवारों में इस दौरान मंदिर या पूजा सामग्री को छूने से परहेज किया जाता है, जबकि कई परिवारों और धार्मिक परंपराओं में ऐसा कोई सार्वभौमिक निषेध नहीं माना जाता। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का सम्मान करते हुए पूजा का तरीका तय किया जा सकता है।
मानसिक पूजा भी है भक्ति का माध्यम
अगर स्पर्श करके पूजा करना संभव न हो तो मानसिक पूजा की जा सकती है। सुबह संकल्प लेकर आंखें बंद करके भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान और अभिषेक की कल्पना करें। मन ही मन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें, भगवान कृष्णजी का ध्यान करें और भजन-कीर्तन के जरिए अपनी भक्ति व्यक्त करें।
पीरियड्स में लड्डू गोपाल की सेवा कैसे करें?
जन्माष्टमी के दौरान अगर पीरियड्स शुरू हो जाएं तो लड्डू गोपाल की सेवा को लेकर भी घर-घर में अलग मान्यताएं हैं। यदि आपकी पारिवारिक परंपरा पूजा के दौरान प्रतिमा को स्पर्श करने की अनुमति देती है तो आप बिना किसी परेशानी के पूजा कर सकती हैं। वहीं अगर परिवार की परंपरा में प्रतिमा को स्पर्श करने से परहेज है तो परिवार का कोई अन्य सदस्य लड्डू गोपाल की सेवा कर सकता है।
मध्य रात्रि में ऐसे कराएं पूजा
परिवार का कोई सदस्य मध्य रात्रि यानी रात 12 बजे लड्डू गोपाल का अभिषेक कर सकता है। इसके बाद बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर भोग लगाया जा सकता है। आप सामान्य रूप से भगवान को भोग, फूल, तुलसी दल और दीप अर्पित करवा सकती हैं।
भोग बनाने को लेकर क्या है मान्यता?
ज्योतिष के अनुसार, अगर व्रत के दौरान पीरियड्स आ जाएं तो भोग में इस्तेमाल होने वाले माखन-मिश्री, पंजीरी और पाग आदि खुद न बनाने की मान्यता बताई गई है। इसके लिए परिवार के किसी अन्य सदस्य की मदद ली जा सकती है। उन्हें भोग बनाने का तरीका बताया जा सकता है और उनके बनाए हुए प्रसाद को ही सभी व्रत रखने वाले लोग ग्रहण कर सकते हैं।
आस्था के साथ सेहत का रखें ध्यान
सबसे जरूरी बात यह है कि मासिक धर्म को अपवित्रता के रूप में देखने के बजाय इसे एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया समझना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में मन की श्रद्धा को सबसे अहम माना जा सकता है। इसलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर व्रत और पूजा का निर्णय अपनी आस्था, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार लेना बेहतर है।
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