भारत के पहले सेटेलाइट ‘आर्यभट्ट’ को बनाने वाले वैज्ञानिक यूआर राव का निधन

इसरो के मुखिया रहे प्रोफेसर यूआर राव का निधन हो गया है। वो 85 साल के थे। यूआर राव भारत की सेटेलाइट क्रांति के जनक थे। उनकी अगुवाई में ही भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ अंतरिक्ष में भेजा गया था। प्रोफेसर यूआर राव का पूरा नाम उडुपी रामचंद्र राव था और साल 1976 में ही पद्मभूषण से सम्मानित होने के अलावा पिछले साल उन्हें भारत सरकार ने पद्म विभूषण से नवाजा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोफेसर यूआर राव के निधन पर दुख जताया है। पीएम मोदी ने कहा कि प्रो. यूआर राव के योगदान को देश कभी नहीं भूल पाएगा।

प्रोफेसर यूआर राव ने अपने करियर की शुरुआत कॉस्मिक रे साइंटिस्ट के तौर पर की थी, पर साल 1972 से वो भारत के सेटेलाइट प्रोग्राम से जुड़ गए। प्रोफेसर यूआर राव की अगुवाई में ही भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट साल 1975 में बनाया गया और अंतरिक्ष तक पहुंचने में सफलता भी हासिल की। इसके अलावा प्रोफेसर राव की अगुवाई में 18 और सेटेलाइट बनाए गए, जिसमें भास्कर, एप्पल, रोहिणी, इनसैट-1, इनसैट-2 जैसी सेटेलाइटें शामिल हैं।

प्रोफेसर राव ने साल 1985 में अंतरिक्ष विभाग की कमान संभाली और उनकी अगुवाई में देश के अपने रॉकेट टेक्नोलॉजी का विकास हुआ। भारत ने साल 1992 में अपने पहले रॉकेट एएसएलवी का परीक्षण किया और बाद में पीएसएलवी बनाया। इसके बाद भारत ने जीएसएलवी बनाकर सारी दुनिया में अपनी तकनीकी का लोहा मनवाया और दूसरे देशों के उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में पहुंचाया।

प्रोफेसर यूआर राव ने करीब 300 वैज्ञानिक और तकनीकी शोध पेपर प्रकाशित कराए, जो देशी और विदेशी जनरलों में प्रकाशित हुए। उन्होंने कई किताबें भी लिखीं, जिसमें ‘फिजिक्स ऑफ द कम्यूनिकेशन’, ‘स्पेस एंड एजेंडा 21- केयरिंग फॉर द प्लानेट अर्थ’ और ‘स्पेस टेक्नोलॉजी फॉर का सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ जैसी किताबें हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रो यूआर राव के आकस्मिक निधन से वो हतप्रभ हैं। देश के स्पेस प्रोग्राम में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
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प्रोफेसर राव ने बीएचयू से एमएससी की पढ़ाई के बाद महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के दिशानिर्देशों में गुजरात विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी।

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