केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे के बाद अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या पूर्व मंत्री(Dharmendra Pradhan) को पेंशन और सरकारी सुविधाएं मिलती रहती हैं। हालांकि, सिर्फ मंत्री पद से इस्तीफा देने के कारण कोई व्यक्ति पेंशन का हकदार नहीं बन जाता। पेंशन मिलने का नियम इस बात पर निर्भर करता है कि वह व्यक्ति सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है या नहीं। जब किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है तो मंत्री पद से जुड़ी सभी सुविधाएं समाप्त हो जाती हैं।
इसमें मंत्री का वेतन, आधिकारिक भत्ते, सरकारी गाड़ी, स्टाफ और पद के आधार पर मिलने वाली अन्य सुविधाएं शामिल होती हैं। इसके अलावा, मंत्री को आवंटित सरकारी आवास भी खाली करना पड़ता है। नियमों के मुताबिक, पूर्व मंत्री को तय समय सीमा के अंदर सरकारी बंगला छोड़ना होता है, जो आमतौर पर पद छोड़ने के करीब एक महीने के भीतर होता है।
सांसद बने रहने पर मिलती रहती हैं सुविधाएं
अगर इस्तीफा देने वाला मंत्री अभी भी संसद का सदस्य है, तो उसकी सांसद वाली सुविधाएं जारी रहती हैं। यानी उसे सांसद के तौर पर मिलने वाला वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और अन्य लाभ मिलते रहते हैं।
नियमों के मुताबिक कोई व्यक्ति एक साथ सांसद का वेतन और पूर्व सांसद की पेंशन नहीं ले सकता। इसलिए मंत्री पद खत्म होने के बाद भी अगर वह सांसद है, तो उसे पेंशन नहीं बल्कि सांसद के रूप में मिलने वाली सुविधाएं मिलती हैं।
कब मिलती है पूर्व सांसद की पेंशन?
किसी पूर्व मंत्री को पेंशन तभी मिलती है जब वह संसद सदस्य नहीं रहता। नियमों के अनुसार, पूर्व सांसदों को हर महीने न्यूनतम ₹31,000 पेंशन दी जाती है। अगर किसी व्यक्ति की संसदीय सेवा 5 साल से अधिक होती है, तो हर अतिरिक्त वर्ष के लिए पेंशन में ₹2,500 प्रति माह की बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा पूर्व सांसदों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए CGHS सुविधा और नियमों के अनुसार भारतीय रेलवे में प्रथम श्रेणी एसी यात्रा जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।