सूरज की सतह पर हुए एक भीषण महाविस्फोट के बाद उत्पन्न हुई ‘सोलर सुनामी’ अगले 72 घंटों में पृथ्वी से टकराने वाली है। अंतरिक्ष मौसम विज्ञानियों की चेतावनी के अनुसार, 9 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के बीच तीन विशाल कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर सीधा प्रहार कर सकते हैं। सूरज के बेहद सक्रिय ‘सनस्पॉट 4549’ में 8 अक्टूबर को दर्ज किए गए विस्फोट से M6.7 श्रेणी की शक्तिशाली सौर लपटें निकली हैं। इसके प्रभाव से वायुमंडल में उथल-पुथल मचने और तकनीक-संचालित सेवाओं में बाधा आने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
16 लाख किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही प्लाज्मा लहर
वैज्ञानिक भाषा में ‘मोर्टन वेव’ कही जाने वाली यह सोलर सुनामी अत्यधिक गर्म प्लाज्मा और चुंबकीय ऊर्जा की विशालकाय लहर है। 8 अक्टूबर को आए इस तूफान का शॉक फ्रंट आकार में हमारी पृथ्वी से कई गुना बड़ा था। यह लहर 16 लाख किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से आगे बढ़ते हुए सौर वायुमंडल के बड़े हिस्से में फैल गई। इसके चलते सूरज की बाहरी परत से अरबों टन आवेशित कण और चुंबकीय ऊर्जा का गुबार अंतरिक्ष में छूट गया, जो अब सीधे पृथ्वी के सुरक्षा कवच यानी मैग्नेटोस्फीयर से टकराने की दिशा में है।
G3 श्रेणी का तूफान और तकनीक पर 3 बड़े नुकसान
अंतरिक्ष विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार G3 (स्ट्रॉन्ग) श्रेणी का जियोमैग्नेटिक यानी भू-चुंबकीय तूफान पृथ्वी से टकरा सकता है। यद्यपि यह मानव शरीर को सीधे नुकसान नहीं पहुँचाता, लेकिन इससे तकनीकी ढांचे पर तीन बड़े दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। पहला, हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो संचार ठप होने से उड़ानों और समुद्री जहाजों का संपर्क टूट सकता है। दूसरा, सैटेलाइट इलेक्ट्रॉनिक्स प्रभावित होने से जीपीएस और गूगल मैप्स जैसी सेवाएं बाधित हो सकती हैं। तीसरा, हाई-वोल्टेज बिजली ग्रिडों में अचानक करंट का भारी उतार-चढ़ाव आने से पावर ग्रिड फेल होने का जोखिम पैदा हो सकता है।
आसमान में दिखेगा ‘ऑरोरा’ का अद्भूत नजारा
इस सौर तूफान का एक बेहद खूबसूरत पहलू रात के समय आसमान में दिखने वाली रंगीन रोशनियां यानी ‘ऑरोरा’ है। जब सूरज के आवेशित कण पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद गैसों से टकराते हैं, तो आसमान में हरी, नीली और गुलाबी रोशनी की जादुई छटा बिखर जाती है। G3 श्रेणी के इस तूफान के कारण यह नजारा केवल ध्रुवीय क्षेत्रों तक सीमित न रहकर अमेरिका, यूरोप और कनाडा के निचले इलाकों में भी देखा जा सकेगा। इस दौरान चंद्रमा का उजाला कम रहने के कारण एस्ट्रो-फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह एक दुर्लभ अवसर होगा।
पैनिक होने की जरूरत नहीं, सतर्क हैं एजेंसियां
अंतरिक्ष एजेंसियों जैसे नासा (NASA) और एनओएए (NOAA) के वैज्ञानिक 24 घंटे सूरज की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक स्वाभाविक ब्रह्मांडीय प्रक्रिया है, इसलिए आम जनता को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस घटना का अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि तीनों CME किस गति और कोण से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं। यह घटना ब्रह्मांडीय शक्तियों और पृथ्वी के प्राकृतिक सुरक्षा कवच की क्षमता को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
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