हिमाचल में अभी भी हैं ‘लुप्त’ हो चुकी पक्षियों की प्रजातियां

शिमला

आजकल भले ही देश में पक्षियों की कई प्रजातियां लुप्त हो रही हों, लेकिन इस मामले में हिमाचल प्रदेश कुछ अलग है, जहां इस समय पक्षियों की 319 प्रजातियां हैं। प्रदेश में वन्य प्राणी विंग के सहयोग से ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट अभियान के तहत किये गये खास सर्वेक्षण में इस बात का पता चला है। चार दिनों तक चलाये गये इस अभियान को प्रदेश के कांगड़ा सहित आठ जिलों में चलाया गया।

50 बर्ड वाचरों से करवाया गया सर्वे 50 बर्ड वाचरों से करवाया गया सर्वे जिसमें पता चला है कि प्रदेश के जंगलों में अभी भी कई दुर्लभ प्रजातियां मौजूद हैं और कांगड़ा में अभी सबसे अधिक प्रजातियां हैं। प्रदेश के वनों में ये सर्वे करने के लिये वन विभाग ने बर्ड वाचर बुलाए थे और एक साथ आठ जिलों में यह अभियान चलाया गया था। इस अभियान के दौरान 16 हजार पक्षियों की गणना की गई। इस कार्य में विभाग के कर्मचारियों समेत 50 बर्ड वाचर लगाये गये थे।

डाटा एकत्र कर किया जाएगा सर्वे

वन विभाग के इस सर्वे के पूरा होने के बाद इस बात का भी पता चलेगा कि यहां पक्षियों का सरंक्षण हो रहा है या नहीं। उन्होंने बताया कि वन विभाग अभी डाटा को एकत्र कर उसका विश्लेषण कर रहा है उसके बाद ही इसका पता लगेगा। इसके साथ यह भी जानकारी मिलेगी कि राज्य में दुर्लभ प्रजातियां मौजूद हैं या नहीं। कहीं यहां प्रजातियां विलुप्त तो नहीं हो रही।

इतने बड़े स्तर पर पहली बार हुआ है

सर्वे इतने बड़े स्तर पर पहली बार हुआ है सर्वे वन विभाग के पीसीसीएफ एसके शर्मा के मुताबिक प्रदेश में पहली बार ऐसा विस्तृत सर्वे हुआ है। इस सर्वे की विस्तार से रिपोर्ट तैयार की जाएगी। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पता चलेगा कि प्रदेश में पक्षियों की कितनी प्रजातियां हैं। उनका कहना था कि राज्य में कई दुर्लभ पक्षी भी पाए गए हैं । दुर्लभ प्रजातियों और पक्षियों की संख्या का भी जल्द पता चलेगा। उनका कहना था कि ये सर्वे आगे भी जारी रहेगा।

भविष्य में भी ऐसे अभियान चलेंगे

शर्मा ने कहा कि ई-बर्ड से उन्हें जो डाटा मिला है, उसके मुताबिक राज्य में पक्षियों की 564 प्रजातियां पाई जाती हैं। जबकि देश में इन प्रजातियों की तादाद 1263 हैं। राज्य में देश की कुल प्रजातियों की 45 फीसदी संख्या है। इसमें से कांगड़ा में सर्वाधिक 453 प्रजातियां पाई जाती हैं। उनका कहना था कि वन्यप्राणी विंग आगे भी ऐसा अभियान चलाएगा और इससे विभाग को पक्षियों की सही गणना का पता चलेगा और उनकी संख्या कितनी है, इसकी भी जानकारी मिलेगी।

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