जानिए, किस अमेरिकी तकनीक से अब मधुमेह और कैंसर का इलाज होगा

उत्तर भारत के असाध्य रोगियों के लिए कैंसर, मधुमेह का इलाज अब आसान हो गया है। अमेरिका में प्रचलित आधुनिक स्टेम सैल चिकित्सा उपचार पद्धति से सफल उपचार हो रहा है। इसका संचालन भारतीय मूल के दो अप्रवासी विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. सतीश सूद (एमडी) और डॉ.रमा सूद कर रहे हैं। पिछले चार दशकों का चिकित्सकों को अमेरिका में अनुभव है। अब, दोनों अनुभवी चिकित्सकों ने हरियाणा के पंचकूला में आधुनिक स्टेम सैल चिकित्सा उपचार पद्धति का एक केंद्र शीघ्र खोलने की इच्छा जताई है।

सेवानिवृत्त मुख्य चिकित्साधिकारी सिरमौर डॉ. एस गांधी ने कहा कि आधुनिक स्टेम सैल चिकित्सा उपचार पद्धति अमेरिका और भारत में बहुत चुनिंदा ही कुछ स्थानों पर है। इससे असाध्य रोगों में आश्चर्यजनक परिणाम देखा गया। इससे नवीन चिकित्सा उपचार पद्धति नई आशा की किरण के रूप में बन कर उभरी है।

इस पद्धति से असाध्य रोगों जैसे कैंसर, मधुमेह, पार्किंन्सन, गठिया रोग (आस्थियों ऑर्थोयटिस) की चोट, क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पाल्मोलरी रोग (सीओपीडी), जोड़ों की चोट और असाध्य आंखों की रेटिना की बीमारी का सफलतापूर्वक उपचार किया जाता है। अप्रवासी भारतीय विशेषज्ञ डॉ. सतीश सूद और डॉ. रमा सूद पिछले चार दशकों से अमेरिका में सेवाएं दे रहे हैं।

दोनों शीघ्र एक स्टेम सैल चिकित्सा केंद्र हरियाणा के पंचकूला में खोलने जा रहे हैं, जिससे हिमाचल, हरियाणा, पंजाब और जेएंडके समेत उत्तर भारत के लोगों को महंगी आधुनिक चिकित्सा सुविधा कम कीमत पर मिल सकें। पिछले 40 वर्षों से अमेरिका में चिकित्सक सेवा दे रहे हैं।

कैसे होता है आधुनिक उपचार
अमर उजाला से बातचीत में अप्रवासी भारतीय चिकित्सक डॉ. सतीश सूद (एमडी) ने कहा कि इस चिकित्सा में उपचार के लिए रोगी के शरीर से ही रक्त, कोशिकाओं को लेकर, यंत्र द्वारा 4-5 घंटों के अंतराल में उनकी अभिवृद्धि कर रक्त में या संक्रमित अंग में पुन: प्रत्यारोपित किया जाता है।

अमेरिका में काफी महंगा उपचार पड़ता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पद्धति में दीर्घकालीन औषधीय प्रयोग से बचाव होता है। चिकित्सक ने कहा कि हार्दिक इच्छा है कि अपने देश के पंचकूला में उपचार केंद्र खोला जाए। इससे कम कीमत पर, उत्तर भारत के असाध्य रोगियों का उपचार हो सकेगा।

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