दिल्ली के क्रिकेट जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां पूर्व रणजी ट्रॉफी बाएं हाथ के स्पिनर और डीडीसीए के पूर्व खेल प्रशासक अरुण खुराना का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को निधन हो गया है। वह 67 वर्ष के थे और उनके यूं चले जाने से पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है, क्योंकि उन्हें एक बेहतरीन खिलाड़ी के साथ-साथ एक बेहद विनम्र इंसान के रूप में भी जाना जाता था।
शख्सियत और खेल जीवन
अपने खेल के दिनों में अरुण खुराना ने अपनी शानदार बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी और खेल की गहरी समझ से सभी का दिल जीता था। मैदान पर उनका प्रदर्शन जितना शानदार था, मैदान के बाहर उनका स्वभाव उतना ही सरल और जमीन से जुड़ा हुआ था, जिसके कारण उनके साथी खिलाड़ी और विरोधी भी उनका बेहद सम्मान करते थे।
कॉलेज क्रिकेट का ऐतिहासिक पल
घरेलू और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के अलावा कॉलेज के दिनों में भी उनका खेल सफर बेहद शानदार और यादगार रहा था। उन्होंने पीजीडीएवी कॉलेज की क्रिकेट टीम की कप्तानी की थी और उनके नेतृत्व में डीएवी कॉलेज ने पहली बार इंटर-कॉलेज क्रिकेट टूर्नामेंट का खिताब जीतकर इतिहास रचा था, जो आज भी कॉलेज के खेल इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय माना जाता है।
डीडीसीए में प्रशासनिक भूमिका
खिलाड़ी के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ने के बाद उन्होंने खेल प्रशासन में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज से लगभग एक दशक पहले उन्होंने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) में खेल प्रशासक के पद पर रहते हुए क्रिकेट के विकास और प्रबंधन में अपना अहम योगदान दिया था।
अरुण खुराना के यूं अचानक दुनिया से चले जाने से दिल्ली का क्रिकेट परिवार स्तब्ध है और हर कोई नम आंखों से उन्हें याद कर रहा है। भले ही वह आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका खेल कौशल, उनकी विनम्रता और दिल्ली क्रिकेट के प्रति उनका समर्पण हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

