उत्तर प्रदेश में सैन्य सेवा पूरी कर चुके अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में अवसर देने के लिए योगी सरकार ने भर्ती नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग की भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों को 20 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उनकी अधिकतम आयु सीमा 25 से बढ़ाकर 28 वर्ष करने का फैसला भी लिया गया है। कैबिनेट बैठक में शहरी परिवहन को लेकर भी अहम निर्णय हुआ। इसके तहत प्रदेश के 18 शहरों में कुल 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना को मंजूरी दी गई है।
चार विभागों की भर्ती में मिलेगा आरक्षण
पूर्व अग्निवीरों को पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग में होने वाली भर्तियों में 20 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा। नियमों में संशोधन के बाद उनकी अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष से बढ़कर 28 वर्ष हो जाएगी। इससे उन्हें भर्ती के लिए तीन साल की अतिरिक्त आयु छूट मिलेगी। सरकार के फैसले के अनुसार, पूर्व अग्निवीरों को भर्ती परीक्षा में लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट दी जाएगी। उन्हें केवल मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा। अभ्यर्थियों को उनकी मूल श्रेणी के मुताबिक आरक्षण का लाभ भी मिलेगा। अग्निपथ योजना के तहत वर्ष 2022 में भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पूर्व अग्निवीरों को राज्य की सरकारी सेवाओं में अवसर देने के लिए नियमावली में यह संशोधन किया गया है।
18 शहरों में चलेंगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें
सरकार की योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा सहित जेवर क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जाएंगी। बसों का संचालन ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर करेंगे। अनुबंध की अवधि 12 साल होगी। बसों की खरीद, चार्जिंग उपकरण, चालक और तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती के साथ रखरखाव की जिम्मेदारी भी निजी कंपनियों की होगी।
किराया तय करेगी सरकार
इलेक्ट्रिक बसों का किराया राज्य सरकार निर्धारित करेगी। बसों के डिपो बनाने के लिए संबंधित नगर निगम और नोएडा प्राधिकरण जरूरत के अनुसार निशुल्क भूमि उपलब्ध कराएंगे। निजी ऑपरेटरों को पहले से तय प्रदर्शन मानकों के आधार पर संचालन और रखरखाव का भुगतान किया जाएगा।फिलहाल प्रदेश के 15 नगर निगमों में 743 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। नई योजना लागू होने के बाद शहरी परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों का दायरा बढ़ेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे यात्रियों को वातानुकूलित सार्वजनिक परिवहन का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
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