ITR Filing 2026: एसेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। अब तक एक करोड़ से अधिक करदाता अपना रिटर्न दाखिल कर चुके हैं। जिन लोगों ने अभी तक ITR फाइल नहीं किया है, उन्हें समय रहते यह काम निपटा लेना चाहिए। वहीं, यदि कोई करदाता पिछले साल का रिटर्न दाखिल करना भूल गया था या किसी वजह से समय पर ITR नहीं भर पाया था, तो उसके लिए भी अब एक ऑप्शन मौजूद है।
ITR-U के जरिए पुराने रिटर्न की गलती सुधारने का मौका
ऐसे करदाता अपडेटेड रिटर्न यानी ITR-U दाखिल कर सकते हैं। इस सुविधा के जरिए पिछली आय का सही विवरण आयकर विभाग को दिया जा सकता है। इसका उपयोग विशेष रूप से वे करदाता कर सकते हैं जिन्होंने अपनी मूल रिटर्न में अतिरिक्त आय का खुलासा नहीं किया था या किसी वजह से सही जानकारी नहीं दे पाए थे।
धारा 139(8A) के तहत मिलती है यह सुविधा
आयकर अधिनियम की धारा 139(8A) के तहत ITR-U दाखिल करने की सुविधा दी गई है। यदि कोई व्यक्ति सामान्य (Original), बिलैटेड (Belated) या रिवाइज्ड (Revised) रिटर्न दाखिल करने की तय समयसीमा चूक जाता है, तब भी वह इस प्रावधान के तहत अपडेटेड रिटर्न भर सकता है। इसका उद्देश्य करदाताओं को सही टैक्स जमा करने का अवसर देना और संभावित कानूनी कार्रवाई या नोटिस से बचाना है।
अब 4 साल तक दाखिल किया जा सकता है ITR-U
अब करदाता संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने के 48 महीने यानी 4 साल के भीतर ITR-U दाखिल कर सकते हैं। पहले यह समय सीमा 24 महीने थी। ऐसे में AY 2025-26 का रिटर्न भी तय शर्तों को पूरा करने पर अब दाखिल किया जा सकता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि ITR-U गलतियों को सुधारने का अच्छा ऑप्शन है, हालांकि इसके साथ अतिरिक्त टैक्स और कुछ निर्धारित शर्तें भी लागू होती हैं।
किन परिस्थितियों में भर सकते हैं ITR-U
यदि किसी करदाता ने मूल ITR दाखिल नहीं किया था, रिटर्न में अतिरिक्त आय दिखाना भूल गया था, गलती से अपनी आय कम घोषित कर दी थी या अपनी वास्तविक टैक्स देनदारी को सही करना चाहता है, तो वह ITR-U दाखिल कर सकता है। यह सुविधा केवल उन मामलों के लिए है जहां करदाता अपनी कर देनदारी को सही करना चाहता हो।
इन मामलों में नहीं मिलेगा ITR-U का लाभ
हालांकि हर करदाता ITR-U का लाभ नहीं उठा सकता। यदि कोई व्यक्ति टैक्स कम करना चाहता है, रिफंड का दावा करना चाहता है, नुकसान (Loss) दिखाना चाहता है या उसके खिलाफ आयकर विभाग की सर्च या सर्वे की कार्रवाई हो चुकी है, तो वह ITR-U दाखिल नहीं कर सकता।
देरी के हिसाब से देना होगा अतिरिक्त टैक्स
ITR-U दाखिल करने पर अतिरिक्त टैक्स देना जरुरी है। यदि रिटर्न 12 महीने के भीतर दाखिल किया जाता है तो कुल टैक्स और ब्याज पर 25% अतिरिक्त राशि देनी होगी। 12 से 24 महीने के बीच यह अतिरिक्त टैक्स 50% होगा। 24 से 36 महीने के बीच 60 % और 36 से 48 महीने के बीच रिटर्न दाखिल करने पर कुल टैक्स और ब्याज पर 70% ज्यादा पैसा देना होगा।
क्या ITR-U के जरिए रिफंड मिल सकता है?
नहीं बिलकुल नहीं। ITR-U का इस्तेमाल रिफंड पाने या पहले से मिलने वाले रिफंड की राशि बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता। इसका उद्देश्य केवल बकाया टैक्स का भुगतान करना और पहले छूट गई आय की जानकारी आयकर विभाग को देना है।
ऑनलाइन ऐसे कर सकते हैं आवेदन
ITR-U दाखिल करने के लिए संबंधित असेसमेंट ईयर का ITR फॉर्म भरने के साथ Form ITR-U भी जमा करना होता है। जरुरी टैक्स, ब्याज और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने के बाद इसे आयकर विभाग की आधिकारिक ई-फाइलिंग वेबसाइट से ऑनलाइन सबमिट किया जा सकता है। इससे करदाता अपनी पुरानी गलतियों को सुधारकर टैक्स रिकॉर्ड को सही बना सकते हैं।
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