India US Relations: अमेरिका की ओर से आठ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को PERM (Permanent Labour Certification) कार्यक्रम से निलंबित किए जाने पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का यह कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करता। भारत ने खास तौर पर टेक्नोलॉजी क्षेत्र और कुशल पेशेवरों की आवाजाही को दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
आठ कंपनियों पर हुई है कार्रवाई
अमेरिकी प्रशासन ने 8 अक्टूबर को Microsoft, Adobe, Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, HCL Technologies और Capgemini को PERM प्रक्रिया से निलंबित किया। PERM अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का अहम चरण है। अमेरिकी सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे विदेशी श्रमिकों से जुड़े इमिग्रेशन कार्यक्रमों के दुरुपयोग और अमेरिकी कामगारों के हितों की रक्षा का तर्क दिया है।
भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी से भी नाराजगी
मामला केवल कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने H-1B कार्यक्रम के तहत काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को ”indentured servants” यानी ‘बंधुआ मजदूर’ कहकर टिप्पणी की। भारत ने इस भाषा पर भी आपत्ति जताई और इसे ‘बेहद अपमानजनक’ बताया। भारतीय पक्ष का कहना है कि भारतीय पेशेवर अमेरिका की अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षेत्र और कंपनियों में अहम योगदान देते हैं।
PERM बंद होने का मतलब क्या है?
PERM रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम है। अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले के बाद प्रभावित कंपनियां नई PERM अर्जियां दाखिल नहीं कर पाएंगी और लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया रुक जाएगी। हालांकि, इस कार्रवाई से मौजूदा H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होते।
भारत-अमेरिका संबंधों के बीच बढ़ा तनाव
भारत का सख्त रुख ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देश तकनीक, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। भारत ने कहा है कि प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, कुशल पेशेवर अमेरिकी कंपनियों को तकनीकी प्रतिभा, नवाचार, शोध, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा में मदद करते हैं।
अमेरिकी आरोपों पर कंपनियों का भी पक्ष
अमेरिकी प्रशासन ने कंपनियों पर अमेरिकी कामगारों की कीमत पर विदेशी कर्मचारियों को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, Microsoft ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके करीब 80 फीसदी H-1B आवेदन पहले से कंपनी में काम कर रहे कर्मचारियों की स्थिति बढ़ाने या बदलने से जुड़े थे।
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