11 सितंबर, 2001 के हमलों के दो दशक से भी ज़्यादा समय बाद, 9/11 हमले के कथित मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद का जून 2028 में अमेरिकी मिलिट्री कोर्ट में ट्रायल शुरू होने वाला है। बुधवार को कई अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने एक जज के फैसले का हवाला देते हुए यह जानकारी दी।
अमेरिकी मिलिट्री जज एयर फ़ोर्स लेफ्टिनेंट कर्नल माइकल ए. श्रमा के एक फैसले में तारीख तय करने के बाद, यह ट्रायल 5 जून, 2028 को शुरू होना है। सरकारी वकीलों ने जनवरी 2027 में ट्रायल शुरू करने की मांग की थी, लेकिन जज ने कहा कि ट्रायल से पहले के विवादों को सुलझाने के लिए और समय की ज़रूरत है, जिसमें यह तय करना भी शामिल है कि कौन से सबूत पेश किए जा सकते हैं।
कौन है खालिद शेख मोहम्मद?
मार्च 2003 में पाकिस्तान में पकड़े जाने से पहले खालिद शेख मोहम्मद को अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता था। उसे तीन साल तक CIA की गुप्त हिरासत में रखा गया और फिर 2006 में क्यूबा के ग्वांतानामो बे स्थित अमेरिकी मिलिट्री जेल में भेज दिया गया।
मोहम्मद पर चार यात्री विमानों को हाईजैक करने और उन्हें अमेरिका में अलग-अलग ठिकानों से टकराने की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का आरोप है। दो विमान न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराए, जबकि एक अन्य विमान पेंटागन से टकराया। चौथा विमान यात्रियों और क्रू द्वारा नियंत्रण वापस पाने की कोशिश के बाद पेंसिल्वेनिया के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उसका ट्रायल उसके तीन कथित साथियों – वलीद बिन अताश, अली अब्दुल अज़ीज़ अली और मुस्तफ़ा अल-हवसावी के साथ होगा।
ट्रायल में बार-बार देरी हुई है
लंबे समय से प्रतीक्षित इस ट्रायल में बार-बार देरी हुई है। 2021 के लिए पहले से तय ट्रायल को बाद में रद्द कर दिया गया था, जबकि नई तारीख भी बदल सकती है, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि मामला कानूनी समय-सीमाओं को पूरा करता है या नहीं। सबूतों और CIA की हिरासत में इन लोगों के साथ किए गए व्यवहार को लेकर हुए विवादों के कारण कार्यवाही जटिल हो गई है।
पिछले साल एक फेडरल अपील्स कोर्ट ने उस समझौते को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत मोहम्मद और दो अन्य आरोपियों को बिना पैरोल के उम्रकैद की सज़ा के बदले अपना अपराध स्वीकार करने की अनुमति मिलती, जिससे उन्हें मौत की सज़ा की संभावना से बचाया जा सकता था।
दो साल तक चली बातचीत के बाद हुए इस प्रस्तावित समझौते के तहत इन लोगों को 9/11 पीड़ितों के परिवारों के सवालों का जवाब भी देना होता। बाद में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने इस समझौते को खारिज कर दिया।
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