नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) ने बैच 2026 के लिए होने वाला अपना 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने पहले 12 सितंबर को समारोह आयोजित करने की घोषणा की थी, लेकिन छात्रों और पूर्व छात्रों के विरोध के बाद अब समारोह के बजाय स्नातक छात्रों को डिग्रियां अनुपस्थिति में प्रदान करने का फैसला लिया गया है। यूनिवर्सिटी की ओर से 27 जुलाई को जारी नोटिस में बताया गया कि डिग्री प्रदान करने का फैसला गवर्निंग बॉडी की मंजूरी के बाद लिया गया है। छात्रों को उनकी डिग्री और प्रमाणपत्र कूरियर से भेजे जाएंगे या वे इन्हें कैंपस से स्वयं प्राप्त कर सकेंगे।
CJI और BCI चेयरमैन को बुलाने पर हुआ विरोध
दीक्षांत समारोह रद्द किए जाने के पीछे छात्रों और पूर्व छात्रों का विरोध प्रमुख वजह बताया जा रहा है। विवाद तब बढ़ा जब समारोह में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा और CJI सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने की जानकारी सामने आई। 700 से अधिक छात्रों और पूर्व छात्रों ने दोनों को समारोह में बुलाए जाने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने BCI से NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्र और फैकल्टी समुदाय से बिना शर्त माफी मांगने की मांग भी की थी।
NALSAR के छात्रों के विरोध से शुरू हुआ विवाद
विवाद की जड़ NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से जुड़ी है। 13 अगस्त को BCI ने NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का फैसला किया था। यह कार्रवाई छात्रों की ओर से अपने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत की मौजूदगी का विरोध किए जाने के बाद हुई थी। हालांकि, विरोध बढ़ने के बाद BCI ने कुछ ही घंटों में अपना फैसला वापस ले लिया। इसके बाद NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
छात्रों ने BCI के निर्देशों पर भी जताई आपत्ति
विरोध कर रहे छात्रों और पूर्व छात्रों ने BCI की ओर से आंदोलन में शामिल छात्रों और फैकल्टी की पहचान करने के निर्देश को लेकर भी आपत्ति जताई। इसे उन्होंने ‘विच-हंट’ बताया। जानकारी के मुताबिक, BCI के फैसलों और छात्रों के विरोध के समर्थन में 165 स्नातक छात्रों, 409 वर्तमान छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए थे।
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