भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और अवैध कंटेंट को लेकर बढ़ती सख्ती के बीच मेटा के CEO मार्क जकरबर्ग ने चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन से जुड़ी खामियों पर खेद जताया है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दिए गए थे। इसी दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि मेटा की भूमिका सिर्फ निष्क्रिय इंटरमीडियरी की नहीं मानी जा सकती, क्योंकि प्लेटफॉर्म यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किस उपयोगकर्ता तक पहुंचेगा। ऐसे में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर भी सवाल उठे हैं।
NCPCR के नोटिस के बाद बढ़ी जांच
Meta के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने अपनी टीम के साथ केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक से पहले Meta के अधिकारियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन से भी चर्चा की।इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने 3 जुलाई 2026 को एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर संज्ञान लेते हुए मेटा को नोटिस जारी किया था। नोटिस में चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूज मटेरियल (CSEAM) से जुड़े विज्ञापनों पर जवाब मांगा गया था। मेटा ने एक सप्ताह बाद अपना जवाब सौंपा, जिसके बाद आयोग ने मामले में आगे जांच की बात कही थी।
मार्क ज़करबर्ग ने CSAM (बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म चलाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगी।
उन्हें साफ तौर पर बताया गया कि वे 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) की परिभाषा के दायरे में नहीं आते हैं। वे खुद तय करते हैं कि कंटेंट किसे मिलेगा। IT एक्ट के… pic.twitter.com/GV8CcisrZe
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 5, 2026
‘सेफ हार्बर’ पर उठे सवाल
डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन को लेकर 3 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मामलों से जुड़ी संसदीय समिति की बैठक में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों और महिलाओं से संबंधित आपत्तिजनक कंटेंट का मुद्दा उठाया गया। समिति ने मेटा समेत अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से इस संबंध में जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही। समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने यह भी संकेत दिया कि सोशल मीडिया कंपनियों को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ कानूनी सुरक्षा की समीक्षा की जा सकती है। यह प्रावधान इंटरनेट और सोशल मीडिया कंपनियों को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट किए गए थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए सीमित कानूनी संरक्षण देता है।
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