Deepfake Rules 2026: डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार होने वाले कंटेंट के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने नियमों को और सख्त कर दिया है। अब AI से बनाए गए फोटो, वीडियो और दूसरे कंटेंट की पहचान आसान बनाने के लिए उन पर लेबल लगाना जरूरी होगा। वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी AI और डीपफेक कंटेंट के खिलाफ पहले की तुलना में कहीं तेजी से कार्रवाई करनी होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में इसकी जानकारी दी है।
AI से बनी फोटो-वीडियो पर दिखाना होगा लेबल
नए नियमों के तहत AI की मदद से तैयार किए गए फोटो, वीडियो और दूसरे कंटेंट पर साफ तौर पर यह बताना होगा कि वह AI से बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य यूजर्स को यह समझने में मदद करना है कि इंटरनेट पर दिखाई दे रही तस्वीर या वीडियो असली है या AI से तैयार की गई है।
36 घंटे की जगह अब सिर्फ 3 घंटे
गैरकानूनी AI और डीपफेक कंटेंट को हटाने की समय-सीमा में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले ऐसे कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे तक का समय मिलता था, लेकिन अब यह समय घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया गया है। कुछ संवेदनशील मामलों में शिकायत मिलने के 2 घंटे के भीतर कार्रवाई करना भी जरूरी होगा।
प्लेटफॉर्म को खुद करनी होगी निगरानी
सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है। प्लेटफॉर्म को AI और ऑटोमेटेड टूल्स की मदद से डीपफेक और दूसरे गैरकानूनी AI कंटेंट की पहचान करनी होगी और उसे फैलने से रोकना होगा। यानी कंपनियां केवल यूजर की शिकायत का इंतजार नहीं कर सकतीं, बल्कि उन्हें खुद भी ऐसे कंटेंट पर नजर रखनी होगी।
इन कंटेंट पर होगी सख्त कार्रवाई
नए नियमों के तहत डीपफेक वीडियो और तस्वीरों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की पहचान बनाकर किया गया प्रतिरूपण (Impersonation), बिना अनुमति साझा की गई निजी या अंतरंग तस्वीरें (NCII) और बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट (CSAM) पर सख्ती की जाएगी।
नियम तोड़े तो Safe Harbour का फायदा नहीं
अगर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नए नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ की कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी। ऐसी स्थिति में संबंधित प्लेटफॉर्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
IT Act और BNS के तहत होगी कार्रवाई
सरकार के मुताबिक, आईटी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत पहचान की चोरी, फर्जीवाड़ा, गलत सूचना फैलाने, निजता के उल्लंघन और अश्लील सामग्री शेयर करने जैसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
50 लाख से ज्यादा यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म पर ज्यादा जिम्मेदारी
जिन बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के 50 लाख से अधिक यूजर्स हैं, उन्हें शिकायत अधिकारी नियुक्त करना होगा। साथ ही उन्हें नियमित अनुपालन (Compliance) रिपोर्ट जारी करनी होगी और जांच के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जरूरी सहयोग देना होगा।
शिकायत का समाधान न हो तो GAC में अपील
अगर किसी यूजर की शिकायत का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समाधान नहीं होता है, तो वह ग्रिवेंस अपीलेट कमेटी (GAC) में अपील कर सकता है। वहीं, डीपफेक या किसी भी साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन के जरिए दर्ज कराई जा सकती है।
Deepfake पकड़ने की तकनीक पर भी काम
सरकार ने बताया कि IndiaAI Mission के तहत IIT सहित कई संस्थानों में ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है, जो डीपफेक कंटेंट की पहचान करने में मदद करेगी। इसका मकसद AI के संभावित दुरुपयोग को रोकना और इंटरनेट को ज्यादा सुरक्षित बनाना है।
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