उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में अवैध गर्भपात के एक मामले में नाबालिग छात्रा की जान पर बन आई। आरोप है कि बिना पंजीकरण चल रहे एक अस्पताल में झोलाछाप ने गर्भपात करने की कोशिश की, जिसके दौरान किशोरी की बच्चेदानी फट गई और छोटी आंत को गंभीर नुकसान पहुंचा। हालत बिगड़ने पर उसे गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने आपातकालीन सर्जरी कर उसकी जान बचाई। फिलहाल उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। यह घटना 9 अक्टूबर की रात कैली रोड स्थित बिना पंजीकरण चल रहे ‘परम अस्पताल’ में हुई। मामले में केपी मिश्रा उर्फ मोनू नाम के टेक्नीशियन पर बिना जरूरी चिकित्सकीय योग्यता के गर्भपात करने का आरोप है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की बात कही है।
साढ़े पांच महीने की गर्भवती थी किशोरी
जानकारी के मुताबिक, पीड़िता बस्ती के एक इंटर कॉलेज में पढ़ती है। उसके पिता अयोध्या में प्रसाद की दुकान चलाते हैं। बताया गया है कि पड़ोस के एक युवक के संपर्क में आने के बाद किशोरी करीब साढ़े पांच महीने की गर्भवती हो गई थी। परिवार इस मामले को छिपाना चाहता था और इसी दौरान उसे झोलाछाप के पास ले जाया गया। आरोप है कि 9 अक्टूबर की रात गर्भपात की कोशिश के दौरान गंभीर जटिलताएं पैदा हो गईं। किशोरी को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा और उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई। इसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। मामले में गर्भपात की प्रक्रिया और लापरवाही की परिस्थितियों की जांच की जरूरत है।
बच्चेदानी फटी, छोटी आंत को भी पहुंचा गंभीर नुकसान
किशोरी की हालत गंभीर होने पर उसे पहले बस्ती के कैली मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां से उसकी स्थिति को देखते हुए गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने आपातकालीन ऑपरेशन किया। डॉक्टर दुर्गेश कुमार के मुताबिक, किशोरी को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। सर्जरी के जरिए उसकी जान बचाने की कोशिश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चेदानी फटने के साथ छोटी आंत को भी इतना नुकसान पहुंचा था कि उसका क्षतिग्रस्त हिस्सा निकालना पड़ा। इलाज के बावजूद किशोरी की हालत नाजुक बताई गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई का दिया भरोसा
इस घटना के बाद जिले में अवैध चिकित्सा गतिविधियों और बिना पंजीकरण संचालित अस्पतालों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव निगम ने मामले का संज्ञान लेते हुए अस्पताल को सील करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। परिजनों ने भी किशोरी के स्वस्थ होने के बाद कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। फिलहाल मामले में आरोपों की जांच और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय होना बाकी है। यह घटना सुरक्षित और कानूनी चिकित्सा सेवाओं की अहमियत को भी सामने लाती है, खासकर ऐसे मामलों में जहां गर्भवती की उम्र कम हो और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम गंभीर हों।
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