Subhash Chandra: जी ग्रुप (Zee Group) के मालिक डॉ. सुभाष चंद्रा से जुड़े कर्ज मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने उनके सेटलमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत बैंकों और अन्य कर्जदाताओं को करीब 22,006 करोड़ रुपये के कुल बकाये के मुकाबले सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये मिलने हैं। दिए गए आंकड़ों के आधार पर यह कुल कर्ज का लगभग 0.03 प्रतिशत है, जबकि करीब 99.97 प्रतिशत रकम की रिकवरी नहीं हो पाएगी।
दो जजों की राय अलग
इस मामले में NCLT की बेंच के दो सदस्यों के बीच योजना को लेकर मतभेद सामने आया। एक सदस्य योजना के समर्थन में थे, जबकि दूसरे ने इसका विरोध किया। मत बराबर होने के बाद मामले को तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा के सामने रखा गया। उन्होंने सेटलमेंट प्लान के पक्ष में फैसला दिया, जिसके बाद प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।
बैंकों की 75% सहमति से पास हुआ प्लान
कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कर्जदाताओं के निर्धारित बहुमत का समर्थन मिलना जरूरी था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुभाष चंद्रा के प्लान को 80 प्रतिशत से ज्यादा क्रेडिटर्स का समर्थन मिला। इसके चलते योजना को मंजूरी मिल गई। अदालत ने माना कि जब कर्ज देने वाले अधिकांश बैंक समझौते के लिए तैयार हैं, तो ऐसे व्यावसायिक फैसले में अदालत को सीमित दखल देना चाहिए।
LIC Housing और बड़े बैंकों ने किया विरोध
हालांकि सभी बैंक इस समझौते के पक्ष में नहीं थे। एलआईसी हाउसिंग, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक और यूनियन बैंक समेत कई बड़े कर्जदाताओं ने प्रस्ताव का विरोध किया। लेकिन विरोध करने वाले संस्थानों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से कम रहने के कारण वे बहुमत के फैसले को रोक नहीं सके।
2017 में 45,888 करोड़ की संपत्ति का दावा
सुनवाई के दौरान नाराज बैंकों ने सुभाष चंद्रा की संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए। बैंकों के मुताबिक, 2017 में चंद्रा ने अपनी कुल संपत्ति 45,888 करोड़ रुपये बताई थी, जबकि अब यह घटकर महज 31.79 करोड़ रुपये रह गई है। बैंकों ने आशंका जताई कि इतनी बड़ी गिरावट के पीछे संपत्ति छिपाने या गायब करने की वजह हो सकती है।
कोर्ट ने संपत्ति छिपाने की दलील नहीं मानी
हालांकि अदालत ने केवल संपत्ति में भारी गिरावट को धोखाधड़ी का निर्णायक प्रमाण मानने से इनकार कर दिया। अदालत के सामने यह तर्क भी रखा गया कि यदि बैंकों ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, तो मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें 6.5 करोड़ रुपये की पेशकश भी शायद नहीं मिलती। इसी आधार पर सेटलमेंट को स्वीकार करने के पक्ष में फैसला गया।
विजय माल्या ने सोशल मीडिया पर कसा तंज
फैसले की खबर सामने आने के बाद कारोबारी विजय माल्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “अगर यह खबर सच है, तो मेरे दोस्त सुभाष को बहुत-बहुत बधाई। बैंकों और सरकार ने खुद माना है कि उन्होंने मुझसे 6,203 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले 14,100 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं। वहीं दूसरी तरफ कई बड़े कर्जदारों का मामला महज कुछ रुपयों में रफा-दफा हो जाता है। मुझे लगता है कि भारत में कर्ज के इंसाफ का यही नया तरीका है। अब इस पर मीडिया कोई सवाल नहीं उठाएगा।”
If True many congratulations to my friend Subhash.Banks and Government have admitted having recovered Rs 14,100 crores from me against a Judgement debt of Rs 6203 crores. Many more borrowers have settled at a fraction. Indian Debt Resolution Justice I presume. No media questions. pic.twitter.com/5uwxYSAX8H
— Vijay Mallya (@TheVijayMallya) August 26, 2026
माल्या खुद भी कर्ज विवाद में घिरे हैं
विजय माल्या साल 2016 में किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज और वित्तीय संकट के बीच भारत छोड़कर लंदन चले गए थे। भारतीय एजेंसियां और सरकार लंबे समय से उन्हें भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया में जुटी रही हैं। ऐसे में सुभाष चंद्रा मामले पर माल्या की टिप्पणी ने कर्ज वसूली और बड़े डिफॉल्टरों के साथ होने वाले समझौतों को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।
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