तिब्बत में बुधवार को ग्लेशियर फटने के बाद चीन-नेपाल(Nepal) सीमा से लगे इलाकों में हालात बेहद गंभीर हो गए। अचानक आई बाढ़ और तेज बहाव के साथ आए मलबे ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि 1,300 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
इस आपदा का असर स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों पर भी पड़ा है। बताया जा रहा है कि लापता लोगों में कई देशों के पर्यटक शामिल हैं। इनमें कुछ लोग ट्रैकिंग के लिए इस इलाके में पहुंचे थे जबकि कई पर्यटक हिंदू धर्म से जुड़े पवित्र स्थलों की यात्रा पर आए हुए थे।
नेपाल में लगातार बढ़ रहा मौत का आंकड़ा
नेपाल में बाढ़ और मलबे के कारण मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, गुरुवार शाम 5 बजे तक देश के आठ जिलों से कुल 359 शव बरामद किए जा चुके थे। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण कफ्ले ने सोशल मीडिया के जरिए इन आंकड़ों की पुष्टि की।
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो रसुवा में 17, नुवाकोट में 28, धादिंग में 33, चितवन में 132, गोरखा में 30, तनहुँ में 22, नवलपरासी पूर्व में 82 और नवलपरासी पश्चिम में 15 शव बरामद हुए हैं।
राहत और बचाव अभियान जारी
आपदा के बाद नेपाल पुलिस, सेना और अन्य राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रही हैं। बचाव दल मलबे और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को तलाशने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं और लापता लोगों की तलाश जारी है। अधिकारियों की कोशिश है कि प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाने के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।