प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि खेलों का महत्व केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। खेल व्यक्ति को चुनौतियों का सामना करना, हार के बाद दोबारा खड़ा होना और बेहतर प्रतियोगी बनना सिखाते हैं। उन्होंने यह बात ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में युवाओं और खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कही। PM मोदी ने कहा कि स्वस्थ समाज, बेहतर पारिवारिक व्यवस्था और अच्छी कार्य संस्कृति के लिए खेल भावना जरूरी है। यह भावना केवल किताबों या भाषणों से विकसित नहीं हो सकती, बल्कि खेल के मैदान में उतरकर ही इसे बेहतर तरीके से सीखा जा सकता है।
हर जिले में छिपी है खेल प्रतिभा
प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में देश के सैकड़ों जिलों से खिलाड़ी जुड़े हैं। देश के हर जिले में ऐसी प्रतिभाएं मौजूद हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी पहचान बना सकती हैं। जरूरत इन प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें सही अवसर देने की है। उन्होंने भारतीय खेलों के सामने मौजूद चुनौतियों का भी जिक्र किया। PM मोदी ने कहा कि भारत कई ओलंपिक खेलों में अब भी पर्याप्त भागीदारी नहीं करता। उदाहरण के तौर पर उन्होंने सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा के साथ विशाल पहाड़ी क्षेत्र भी हैं। ऐसे में देश में वाटर स्पोर्ट्स से लेकर विंटर स्पोर्ट्स तक कई खेलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। इसके बावजूद इन खेलों में भारत की मौजूदगी मजबूत नहीं है। इसलिए ऐसे खेलों के लिए जरूरी प्रशिक्षण और सुविधाओं का पूरा इकोसिस्टम तैयार करने पर ध्यान देना होगा।
खेल हमें केवल champion बनना नहीं सिखाता… बल्कि खेल हमें एक बेहतर competitor बनना भी सिखाता है।
उठना, गिरना… गिरकर फिर से उठना… Sports, ये ज़ज्बा हमारे भीतर लाता है: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) August 27, 2026

