Bangkok School Shooting: थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के उत्तर में स्थित एक प्रांत के नामी स्कूल में गोलीबारी की सनसनीखेज घटना सामने आई है। एक छात्र ने स्कूल में ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिसमें 15 बच्चे घायल हो गए। इस हमले में एक शिक्षक की मौत हो गई। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, गोली चलाने वाले छात्र ने शिक्षक को गोली मारने के बाद खुद को भी शूट कर लिया, जिससे उसकी भी मौत हो गई।
हमलावर नाबालिग से कम उम्र का था
रिपोर्ट के अनुसार, गोली चलाने वाला छात्र नाबालिग था और उसकी उम्र 19 साल से कम बताई जा रही है। स्थानीय ब्रॉडकास्टर थाई PBC ने स्कूल की पहचान डेबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल के तौर पर की है। घटना के बाद स्कूल और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया।
15 बच्चे घायल, शिक्षक की मौत
गोलीबारी में कुल 15 बच्चों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, हमलावर छात्र की गोली से एक शिक्षक की जान चली गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, छात्र ने पहले शिक्षक को निशाना बनाया और इसके बाद खुद को गोली मार ली।
थाईलैंड में बार-बार क्यों हो रही गोलीबारी?
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस इलाके में यह घटना हुई है, वहां थाईलैंड में बंदूक रखने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। अनुमान के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 1 करोड़ बंदूकें हैं। यानी यहां औसतन हर सात लोगों पर एक बंदूक है। बंदूक रखने से जुड़े कानूनों को सख्त करने के पुराने वादों के बावजूद देश में गोलीबारी की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
फरवरी में भी स्कूल में हुई थी फायरिंग
थाईलैंड में इस तरह की घटना पहले भी सामने आ चुकी है। फरवरी में देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक स्कूल में गोलीबारी करने वाले एक किशोर शूटर को थाई पुलिस ने गोली मारकर गिरफ्तार किया था। उस हमले में स्कूल के प्रिंसिपल की मौत हो गई थी, जबकि दो छात्र घायल हुए थे।
2022 में नर्सरी में हुआ था भीषण नरसंहार
थाईलैंड में साल 2022 में हुई एक गोलीबारी की घटना देश की सबसे भयावह घटनाओं में शामिल है। उस समय बंदूक और चाकू से लैस एक पूर्व पुलिसकर्मी देश के उत्तरी हिस्से में स्थित एक नर्सरी में घुस गया था। हमलावर ने 24 बच्चों और 12 वयस्कों की हत्या कर दी थी। यह घटना थाईलैंड में हुए सबसे भयानक नरसंहारों में से एक मानी जाती है।
बंदूक कानूनों को लेकर फिर उठे सवाल
बैंकॉक के पास स्कूल में हुई ताजा गोलीबारी ने थाईलैंड में हथियारों की उपलब्धता और बंदूक कानूनों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच देश में बंदूक रखने और हथियारों की पहुंच को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग भी जोर पकड़ती रही है।
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