नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुधवार को भारत और चीन का औपचारिक रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान राहत कार्यों में समय पर मदद के लिए उनका आभार जताया, जिसमें 1,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की संसद में बोलते हुए शाह ने कहा, “हमारे मित्र देशों, चीन और भारत ने टेक्नीशियन भेजे थे। पहले दिन से ही उन्होंने इलाके में हुए नुकसान का अंदाज़ा लगाने और यह पता लगाने के लिए कि क्या उस जगह तक पहुँचना संभव है, हवाई सर्वे समेत कई तरह की जाँच-पड़ताल की।”
उन्होंने आगे कहा, “यह एक असाधारण स्थिति थी। उस जगह पर कीचड़ और गाद इतनी ज़्यादा थी कि न सिर्फ़ खुदाई करने वाली मशीनें, बल्कि सेना और आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स के जवानों के लिए भी खड़े होने की जगह नहीं थी।”
शाह का यह बयान नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के उस आह्वान के बाद आया है जिसमें उन्होंने भारत, चीन और अमेरिका जैसे ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाले देशों से पारंपरिक मानवीय सहायता के बजाय “जलवायु मुआवज़े” की ओर बढ़ने की बात कही थी।
कांतिपुर टीवी को दिए एक इंटरव्यू में खनाल ने कहा, “हम अपने कूटनीतिक ढांचे को सहायता से बदलकर न्याय और मुआवज़े की ओर ले जा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “यह दान का मामला नहीं है, यह कानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारी का मामला है।” उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को “पूरी मज़बूती और स्पष्टता” के साथ उठाएगा।
भारत राहत सामग्री और विशेष सहायता, दोनों ही उपलब्ध करा रहा है। नई दिल्ली ने अब बाढ़ प्रभावित नेपाल को राहत सामग्री की पाँचवीं खेप पहुँचा दी है, और भारतीय वायु सेना आपातकालीन सामान पहुँचाने के लिए कई उड़ानें भर रही है। इसके अलावा, आपदा के बाद भारत ने विशेष खोज और बचाव सहायता की पेशकश भी की थी।
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