दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली 20 रुपये के सिक्के बनाने और उनकी सप्लाई करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। WR-I टीम ने मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास एक टोयोटा इटियॉस कार से नकली सिक्कों की बड़ी खेप बरामद की। पुलिस ने मौके से पारस जैन नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। बरामद सिक्कों की कुल फेस वैल्यू करीब एक लाख रुपये बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह इन सिक्कों को उनकी वास्तविक कीमत से काफी कम दाम पर बाजार में खपाने की कोशिश कर रहा था।
हर पैकेट में थे 100 सिक्के
क्राइम ब्रांच की टीम ने मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास संदिग्ध कार की तलाशी ली तो उसकी पिछली सीट से नकली सिक्कों से भरे 50 पॉलीथिन पैकेट मिले। प्रत्येक पैकेट में 100 सिक्के रखे गए थे। इस तरह पुलिस ने बड़ी संख्या में नकली 20 रुपये के सिक्के जब्त किए, जिनकी कुल फेस वैल्यू लगभग एक लाख रुपये आंकी गई है।
कार से नकली सिक्कों की खेप मिलने के बाद पुलिस ने कथित सप्लायर पारस जैन को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान सिक्कों के अलावा टोयोटा इटियॉस कार, एक आईफोन और लैपटॉप बैग भी जब्त किया गया है।
70 हजार रुपये में सप्लाई हो रहे थे एक लाख के सिक्के
पुलिस के अनुसार, गिरोह एक लाख रुपये की फेस वैल्यू वाले नकली सिक्कों को करीब 70 हजार रुपये में सप्लाई कर रहा था। इस तरीके से सिक्कों को कम कीमत पर उपलब्ध कराकर बाजार में खपाने की योजना थी।
इस मामले में मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा जांच के दौरान तीन अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के सदस्य नकली सिक्के किन लोगों तक पहुंचाते थे और इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है।
सोनीपत से सहारनपुर शिफ्ट की जा रही थी यूनिट
जांच में पता चला है कि नकली सिक्के बनाने वाली यूनिट पहले हरियाणा के सोनीपत में संचालित हो रही थी। बाद में इसे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शिफ्ट किया जा रहा था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सिक्कों का निर्माण कहां किया जाता था और तैयार खेप को दिल्ली समेत अन्य इलाकों में किस तरह पहुंचाया जाता था।
क्राइम ब्रांच गिरोह के पूरे नेटवर्क, नकली सिक्कों के उत्पादन और वितरण से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस की आगे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस अवैध कारोबार का दायरा कितना बड़ा था और अब तक कितनी नकली मुद्रा बाजार में पहुंचाई जा चुकी है।
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