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GLOF: तबाही से पहले मिलेगा अलर्ट! हिमाचल की घेपन झील पर लगा देश का पहला अर्ली वार्निंग सिस्टम

GLOF: हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के खतरे से निपटने के लिए देश का पहला अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित कर दिया गया है। सिस्सु के ऊपर करीब 4,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घेपन झील में लगाए गए इस सिस्टम से झील की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। खतरे के संकेत मिलने पर समय रहते चेतावनी जारी करने में मदद मिलेगी, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि और नुकसान को रोकने की तैयारी की जा सकेगी।

C-DAC ने स्थापित किया सिस्टम

यह अत्याधुनिक प्रणाली सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) ने स्थापित की है। यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की पायलट परियोजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिम को कम करना और प्रारंभिक चेतावनी तंत्र को मजबूत करना है।

14 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई

घेपन झील तक पहुंचना आसान नहीं है। लाहौल घाटी में झील तक पहुंचने के लिए करीब 14 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। हाल ही में डीसी किरण भड़ाना ने खुद झील तक पहुंचकर हालात का जायजा लिया था। झील के लगातार बढ़ते आकार और उससे जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी थी।

झील के पानी पर लगातार नजर

डीसी और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष किरण भड़ाना अर्ली वार्निंग सिस्टम को जल्द स्थापित कराने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लगातार संपर्क में थीं, ताकि झील के पानी के स्तर की वास्तविक स्थिति के आंकड़े लगातार मिल सकें और झील के पानी के स्तर की लगातार निगरानी रखी जा सके।

40 साल में 173 फीसदी बढ़ा क्षेत्रफल

घेपन झील के बढ़ते दायरे ने प्रशासन और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ाई है। नवंबर 2023 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने झील के बढ़ते क्षेत्रफल को लेकर प्रशासन को जानकारी दी थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बीते 40 वर्षों में झील का क्षेत्रफल करीब 173 फीसदी बढ़ चुका है। इसके बाद संभावित जोखिमों का आकलन, वैज्ञानिक अध्ययन, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और आपदा से निपटने की तैयारियों पर विभिन्न स्तरों पर काम शुरू किया गया।

चंद्रा-चिनाब नदी क्षेत्र भी संवेदनशील

प्रशासन ने चंद्रा–चिनाब (चंद्रभागा) नदी के आसपास के उन इलाकों की भी पहचान की है, जहां बाढ़ का खतरा अधिक है। ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करने का उद्देश्य किसी संभावित आपदा की स्थिति में बचाव और राहत कार्यों को तेजी से संचालित करना है।

ऐसे काम करेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम

घेपन झील में स्थापित प्रणाली में बुआय-आधारित झील निगरानी स्टेशन, स्वचालित मौसम स्टेशन और ग्लेशियर विजन यूनिट शामिल हैं। इनके जरिए झील और आसपास के पर्यावरण में होने वाले बदलावों की निगरानी की जाएगी। सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों, दृश्य अवलोकनों और कम्प्यूटेशनल मॉडलों को C-DAC के सुपरकंप्यूटर प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।

खतरे का पहले होगा आकलन

प्रणाली से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर संबंधित आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को झील की स्थिति और संभावित खतरे का आकलन करने में सहायता मिलेगी। इसमें वास्तविक समय का डेटा, निर्धारित मानकों के आधार पर अलर्ट जारी करना, संभावित GLOF परिदृश्यों का अनुकरण और बाढ़ जोखिम का आकलन जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इससे अधिकारियों को आपात स्थिति से पहले बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी।

कई एजेंसियों के सहयोग से पूरा हुआ काम

इस परियोजना को जमीन पर उतारने में जिला प्रशासन लाहौल-स्पीति और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अहम भूमिका रही। प्रशासनिक मंजूरियों, लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं और फील्ड स्तर पर तालमेल का जिम्मा इन संस्थाओं ने संभाला। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, चिकित्सा एवं पुलिस दलों समेत अन्य एजेंसियों ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

दुर्गम इलाके में चुनौतीपूर्ण स्थापना

दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, कठिन पहाड़ी भूभाग और अप्रत्याशित मौसम के बावजूद विभिन्न एजेंसियों और फील्ड टीमों के समन्वित प्रयासों से यह प्रणाली स्थापित हो सकी है। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था हिमालयी क्षेत्र में GLOF जैसे खतरों से निपटने और संभावित जनहानि को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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