केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक बदलावों को आगे बढ़ाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, यह सत्र इसी महीने के आखिरी दिनों में आयोजित किया जा सकता है। सरकार को भरोसा है कि इस बार लोकसभा में प्रस्तावित विधेयकों को पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाया जा सकता है। इसके लिए विपक्षी दलों से बातचीत भी की जा रही है। विशेष सत्र की तैयारी ऐसे समय हो रही है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। ऐसे में संसद में इन मुद्दों के साथ संवैधानिक संशोधनों पर भी राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।
नए सिरे से जुटी सरकार
सरकार इससे पहले भी परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लाने की कोशिश कर चुकी है। बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को लोकसभा में यह विधेयक जरूरी समर्थन हासिल नहीं कर पाया था और पारित नहीं हो सका था।
अब सरकार दोबारा इस मुद्दे को संसद में आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि सत्तापक्ष अपनी मौजूदा संख्या को लेकर आश्वस्त है, लेकिन विधेयकों को पारित कराने के लिए समर्थन बढ़ाने की कोशिश भी जारी है। इसी सिलसिले में कुछ विपक्षी दलों से संपर्क साधा जा रहा है।
डीएमके समेत छोटे दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, सरकार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और कुछ छोटे विपक्षी दलों के साथ बातचीत कर रही है। डीएमके से संपर्क ऐसे समय में हुआ है, जब तमिलनाडु चुनाव के बाद उसके कांग्रेस से अलग होने और इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने की बात सामने आई है। सरकार की रणनीति मतदान से पहले अपने पक्ष में संख्या मजबूत करने की है। हालांकि, इन चर्चाओं के नतीजे और संभावित विधेयकों को लेकर विपक्षी दलों का अंतिम रुख अभी स्पष्ट नहीं है। सरकार की ओर से विशेष सत्र की तारीखों और कार्यसूची पर भी विचार किया जा रहा है।
26-27 अक्टूबर के कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय होगा सत्र
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था, लेकिन उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। ऐसे में विशेष बैठक बुलाने का विकल्प मौजूद है। सूत्रों के अनुसार, सत्र की तारीख तय करते समय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के कार्यक्रम को ध्यान में रखा जाएगा। यह आयोजन 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में होना है। विशेष सत्र बुलाने से पहले लगभग एक सप्ताह का नोटिस दिए जाने की संभावना है। इस बीच विपक्ष एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ अपना विरोध तेज कर रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में विशेष सत्र बुलाने और संवैधानिक संशोधनों को आगे बढ़ाने की सरकार की कोशिश पर सबकी नजर रहेगी।
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