अमेरिका और ईरान के बीच सात महीने से जारी भीषण युद्ध के बीच कूटनीतिक मंच पर हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान खाड़ी सहयोग परिषद के छह प्रमुख देशों के शीर्ष नेताओं और विदेश मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बहुपक्षीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य ईरान युद्ध के बाद की क्षेत्रीय सुरक्षा और भावी व्यवस्था की रणनीति तैयार करना है।
खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर
यह बैठक खाड़ी के देशों के लिए अत्यंत संवेदनशील समय पर हो रही है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद होने के कारण ये देश सीधे तौर पर युद्ध की आंच झेल रहे हैं। ईरानी हमलों के खतरे के साथ-साथ तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात में आ रही बाधाओं से इन देशों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि अमेरिका की युद्धोत्तर योजना पर सहमति बनना इन सभी देशों के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
गाजा शांति फॉर्मूले को दोहराने की तैयारी
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप इस बैठक के जरिए अपने पुराने गाजा शांति फॉर्मूले को फिर से दोहरा सकते हैं। पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी उन्होंने आठ अरब और मुस्लिम देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर गाजा शांति प्रस्ताव का मसौदा साझा किया था, जिसके बाद समझौते का रास्ता साफ हुआ था। विदेश विभाग द्वारा शुरुआती निमंत्रण भेजे जाने के बाद माना जा रहा है कि इस बैठक का दायरा बढ़ाकर अन्य मुस्लिम देशों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।
ट्रंप के दावे और जमीनी संघर्ष में अंतर
डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि युद्ध अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है और ईरान ने सीधे तौर पर समझौते की इच्छा जाहिर की है। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट दर्शाती है कि युद्ध सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है और धरातल पर सैन्य संघर्ष बदस्तूर जारी है। ऐसे में ट्रंप के बयानों और वास्तविक स्थिति के बीच का अंतर यह संकेत देता है कि तत्काल युद्धविराम पर पहुंचना इतना आसान नहीं होगा।
नेतन्याहू से मुलाकात की तारीख अब तक अनिश्चित
इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी इस दौरान ट्रंप से मुलाकात करने के उत्सुक हैं। हालांकि, इजरायली सूत्रों के अनुसार अभी तक दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बैठक का समय निर्धारित नहीं हो सका है। खाड़ी देशों के साथ सामूहिक चर्चा को प्राथमिकता मिलना और इजरायली प्रधानमंत्री से समय तय न होना इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
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