दीपावली(Diwali) का त्योहार अपने साथ खुशियां और उत्साह लेकर आता है, लेकिन त्योहार खत्म होने के बाद इसका असर सेहत पर भी दिखाई देने लगता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और हवा में मौजूद जहरीले कण प्रदूषण का स्तर बढ़ा देते हैं। इसके कारण कई लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और त्वचा से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है। ऐसे में दिवाली के बाद सेहत को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
दिवाली के बाद हवा में PM2.5 और PM10 जैसे छोटे प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ सकती है। ये कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इससे खांसी, गले में खराश, सीने में भारीपन और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की परेशानी भी बढ़ सकती है। बचाव के लिए प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर जाने से बचें। जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें। सांस के मरीज अपनी दवाएं और इनहेलर डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस्तेमाल करें।
आंखों और त्वचा में हो सकती है जलन
पटाखों का धुआं आंखों और त्वचा को भी प्रभावित करता है। दिवाली के बाद आंखों में लालिमा, खुजली, जलन और पानी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, प्रदूषण के कारण त्वचा पर खुजली और लाल चकत्ते भी दिखाई दे सकते हैं।
इन परेशानियों से बचने के लिए आंखों को बार-बार न रगड़ें। बाहर से घर लौटने पर चेहरे और हाथों को अच्छी तरह साफ करें। अगर आंखों में लगातार जलन, तेज दर्द या धुंधला दिखाई देने लगे तो डॉक्टर से संपर्क करें।
सिरदर्द और दिल की सेहत का भी रखें ध्यान
प्रदूषण के संपर्क में रहने से सिरदर्द, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हवा में मौजूद बारीक कण दिल और रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं। खासकर हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषण के स्तर को देखकर ही बाहर टहलने या एक्सरसाइज करने का फैसला करें।
पर्याप्त पानी पिएं और घर के अंदर धुएं से बचें। सीने में दर्द, तेज सांस फूलने या अचानक चक्कर आने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। दिवाली के बाद थोड़ी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर प्रदूषण से होने वाली कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है।