Saurav Das Document Verification: कॉकरोच जनता पार्टी के दोनों सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को 17 नवंबर को एक बार फिर स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होना होगा। दोनों नेताओं और उनके जमानतियों द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के चलते अदालत ने दोबारा पेशी के निर्देश दिए हैं।
सौरव दास के दस्तावेजों का नहीं हो पाया सत्यापन
एसईएम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सौरव दास ऐसे दस्तावेज पेश नहीं कर पाए, जिनका सत्यापन पूरा किया जा सके। पुलिस के मुताबिक, सौरव दास ने पुडुचेरी के पते वाला आधार कार्ड जमा किया है। इसके अलावा उन्होंने ग्रेटर कैलाश-1 स्थित एक फ्लैट का रेंट एग्रीमेंट भी अपने बॉन्ड के साथ लगाया है।
रेंट एग्रीमेंट पर पुलिस ने जताई आपत्ति
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ग्रेटर कैलाश के मकान से संबंधित रेंट एग्रीमेंट उन्हें संदिग्ध लग रहा है। एक तरफ पुडुचेरी का आधार कार्ड और दूसरी तरफ दिल्ली के ग्रेटर कैलाश का रेंट एग्रीमेंट होने के कारण दस्तावेजों के सत्यापन में भी दिक्कत आई। इसी वजह से सौरव दास के दस्तावेजों की दोबारा जांच की जाएगी।
आशुतोष रांका के दस्तावेज सही मिले
वहीं, आशुतोष रांका की ओर से जमा किए गए दस्तावेज जांच में सही पाए गए हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की जमानत से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन पूरा नहीं होने के कारण उन्हें जमानत देने वाले दोनों जमानतियों को भी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा।
दोनों नेता सात दिन बाद जेल से बाहर आए
सौरव दास और आशुतोष रांका करीब सात दिन जेल में रहने के बाद बुधवार को बाहर आए थे। जेल से रिहाई के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों के सत्यापन के लिए उन्हें मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।
किसने दी दोनों नेताओं की जमानत?
सौरव दास की जमानत उनके गाजियाबाद निवासी दोस्त ने ली है। बताया गया है कि वह बच्चों से जुड़े एक एनजीओ का संचालन करने के साथ एक निजी कॉलेज में प्रोफेसर भी हैं। वहीं, आशुतोष रांका की जमानत उनकी पत्नी ने दी है, जो मूल रूप से बनारस की रहने वाली हैं और बेंगलुरु की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।
17 नवंबर को फिर होगी दस्तावेजों की जांच
पुलिस के मुताबिक, जमानतियों के दस्तावेजों का सत्यापन भी पहले पूरा नहीं हो पाया था, जिसके चलते उन्हें अदालत में बुलाया गया। अब सौरव दास से जुड़े दस्तावेजों की दोबारा जांच के लिए दोनों नेताओं को 17 नवंबर को फिर अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
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